
- विनोद मिश्रा
बांदा। देश-दुनिया में बाघ संरक्षण की सफलता की मिसाल माने जाने वाले पन्ना टाइगर रिजर्व (पीटीआर) में एक बार फिर बाघ की मौत ने वन विभाग की चिंता बढ़ा दी है। किशनगढ़ कोर रेंज की बृजपुरा बीट में एक वयस्क नर बाघ मृत मिला। सबसे बड़ी बात यह है कि ‘पिछले तीन महीनों में यह तीसरे बाघ की मौत’ है। लगातार हो रही इन घटनाओं ने टाइगर रिजर्व की सुरक्षा, निगरानी और संरक्षण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
शनिवार सुबह नियमित गश्त के दौरान पेट्रोलिंग टीम को दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में एक वयस्क बाघ जमीन पर पड़ा दिखाई दिया। पहले वनकर्मियों को लगा कि वह आराम कर रहा है, लेकिन काफी देर तक कोई हलचल नहीं हुई। टीम जब सावधानी से उसके पास पहुंची तो पता चला कि बाघ की मौत हो चुकी है। सूचना मिलते ही पन्ना टाइगर रिजर्व के अधिकारी मौके पर पहुंचे और नियमानुसार पोस्टमार्टम तथा अन्य वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी गई।
उप संचालक बीरेंद्र कुमार पटेल के अनुसार, घटनास्थल बेहद दुर्गम है, जहां पहुंचने के लिए तीन से चार किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। प्रारंभिक जांच में बाघ के सभी अंग सुरक्षित पाए गए हैं। शरीर पर किसी बाहरी चोट, संघर्ष या शिकार के निशान नहीं मिले हैं। प्रथम दृष्टया मामला प्राकृतिक मृत्यु का प्रतीत हो रहा है, लेकिन वास्तविक कारण पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगा। हालांकि, यह अकेली घटना नहीं है। इससे पहले अमानगंज बफर रेंज में रेडियो कॉलर लगाए गए एक युवा नर बाघ की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी। वहीं गंगऊ अभयारण्य क्षेत्र में एक अन्य नर बाघ का क्षत-विक्षत कंकाल भी बरामद हुआ था। अब लगातार तीसरी मौत ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर बाघों की सुरक्षा व्यवस्था में चूक कहां हो रही है।
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