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October 12, 2026
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डीएम ने कसी 'नकेल': करोड़ों के पौधारोपण में लापरवाही नहीं होगी बर्दाश्त, अब रुकेगा भुगतान
उत्तर प्रदेशबुंदेलखंड

डीएम ने कसी ‘नकेल’: करोड़ों के पौधारोपण में ‘लापरवाही’ नहीं होगी बर्दाश्त, अब रुकेगा भुगतान

विनोद मिश्रा डायरेक्टर सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश

  • विनोद मिश्रा

चित्रकूट। वर्षों से सरकारी पौधारोपण अभियान एक सवाल के घेरे में रहा है। हर साल लाखों पौधे लगाए जाते थे, फोटो खिंचती थीं, रिकॉर्ड बनते थे, लेकिन कुछ ही महीनों बाद अधिकांश पौधे सूख जाते थे। सरकारी धन खर्च होता रहा, मगर हरियाली कागजों तक ही सीमित रह जाती थी। अब चित्रकूट प्रशासन ने इस व्यवस्था को बदलने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। इस बार सिर्फ पौधे लगाने पर नहीं, बल्कि उन्हें दो वर्षों तक जीवित रखने पर जोर दिया गया है। साफ संदेश है ‘पौधे सूखे तो भुगतान भी सूखेगा’।

डीएम ने कसी 'नकेल': करोड़ों के पौधारोपण में लापरवाही नहीं होगी बर्दाश्त, अब रुकेगा भुगतानसीतापुर तिराहे से बेड़ी पुलिया तक लगभग 12.98 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले फुटपाथ एवं सौंदर्यीकरण परियोजना में करीब एक लाख पौधे लगाए जाएंगे। कार्यदायी संस्था को दो वर्षों तक पौधों की सिंचाई, ट्री-गार्ड, खाद, निराई-गुड़ाई, कटाई-छंटाई और सूखने पर नए पौधे लगाने की जिम्मेदारी निभानी होगी। यदि निरीक्षण में पौधे सूखे मिले या देखभाल में लापरवाही पाई गई तो भुगतान रोक दिया जाएगा। अंतिम भुगतान तभी होगा, जब दो वर्ष बाद भौतिक सत्यापन में पौधे जीवित और सुरक्षित पाए जाएंगे। नई व्यवस्था का उद्देश्य केवल पौधे लगाना नहीं, बल्कि उन्हें संरक्षित रखना है। अधिकारी समय-समय पर निरीक्षण करेंगे और जहां पौधे सूखे मिलेंगे, वहां उन्हें तत्काल बदलना होगा।

डीएम ने कसी 'नकेल': करोड़ों के पौधारोपण में लापरवाही नहीं होगी बर्दाश्त, अब रुकेगा भुगताननियमों का पालन न होने पर भुगतान रोकने के साथ संविदा की शर्तों के अनुसार कार्रवाई भी की जाएगी। इस परियोजना के तहत आधुनिक फुटपाथ, हरित पट्टियां, लैंडस्केपिंग, डिवाइडरों का सौंदर्यीकरण, सजावटी पौधे और बैठने की व्यवस्था विकसित की जा रही है, ताकि चित्रकूट आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को स्वच्छ, सुंदर और हराभरा वातावरण मिल सके। जिलाधिकारी पुलकित गर्ग ने कहा कि “पौधे लगाना ही पर्याप्त नहीं, उन्हें जीवित रखना सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।” इसी सोच के तहत दो वर्षों तक संरक्षण की जिम्मेदारी कार्यदायी संस्था को सौंपी गई है। अंतिम भुगतान तभी होगा, जब पौधों के जीवित होने की पुष्टि हो जाएगी। यदि यह मॉडल सफल रहा तो सरकारी पौधारोपण अभियानों की तस्वीर बदल सकती है।

 
 



Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh
 





 

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