
- विनोद मिश्रा
बांदा। जिले में कृषि विभाग की लचर कार्यशैली की पोल डीएम अमित आसेरी की समीक्षा बैठक में खुल गई। विभागीय अधिकारी ‘अपनी-अपनी ढपली, अपना-अपना राग’ अलाप रहे हैं और शासन के निर्देशों पर होने वाली बैठकें केवल औपचारिकता बनकर रह गई हैं। किसानों की ‘रीढ़’ कहे जाने वाले कृषि विभाग की हकीकत सामने आने पर डीएम अमित आसेरी ने ‘कड़ा रुख’ अपनाया।
डीएम अमित आसेरी ने कृषि, पशुपालन, सहकारिता, उद्यान, भूमि संरक्षण और मत्स्य विभाग की योजनाओं की ‘मैराथन समीक्षा’ की। दो-टूक कहा कि शासन की किसान हितैषी योजनाओं का लाभ पूर्ण पारदर्शिता, गुणवत्ता और समयबद्धता के साथ पात्रों तक पहुंचाना ही सर्वोच्च प्राथमिकता है। खेत तालाब योजना में 50% अनुदान का लाभ पात्र किसानों तक नहीं पहुंच रहा। डीएम ने गत वर्ष के लंबित आवेदनों और इस वर्ष के लक्ष्य की समीक्षा कर नाराजगी जताई। निर्देश दिया कि कोई आवेदन निरस्त हो तो उसका ठोस लिखित कारण दर्ज हो।
उन्होंने कहा की कार्यों का सत्यापन नहीं हो रहा। अब हर काम की ड्रोन फोटोग्राफी के साथ स्थलीय निरीक्षण अनिवार्य रूप से हो। खरीफ सीजन ‘सिर’ पर है, लेकिन ‘डीएपी-एमओपी’ की उपलब्धता पर खामोशी। डीएम ने सभी सहकारी खाद समितियों की जियो टैगिंग कराकर गांव-गांव प्रचार-प्रसार के आदेश दिए। मछुआ समुदाय की अनदेखी पर डीएम ने आवंटन जल्द पूरा कर स्थानीय मछुआरों को प्राथमिकता देने को कहा। उद्यान विभाग को लक्ष्य समय से पूरा करने की हिदायत दी। बैठक में सीडीओ अजय कुमार पांडे, जिला उपनिदेशक कृषि अभय कुमार सिंह यादव समेत सभी संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।
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