City News Uttar Pradesh
जल संरक्षण 'घोटाला': पुरस्कार की चकाचौंध में डूबे हजारों तालाब, आंकड़ों की माया उजागर
उत्तर प्रदेशबुंदेलखंड

जल संरक्षण ‘घोटाला’: पुरस्कार की चकाचौंध में डूबे हजारों तालाब, आंकड़ों की माया उजागर !

विनोद मिश्रा डायरेक्टर सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश

  • विनोद मिश्रा

बांदा। राष्ट्रीय जल संरक्षण पुरस्कार से नवाजे जाने वाले बांदा जिले में तालाबों की हकीकत ‘बेहद कड़वी’ है। जहां एक ओर प्रशासन पांच हजार “नए तालाब बनवाने का दावा” कर “वाहवाही लूट” रहा है, वहीं दूसरी ओर जिले के 2575 पारंपरिक तालाबों का कोई नामो-निशान तक नहीं बचा। सैकड़ों जल-स्रोत राजस्व अभिलेखों से गायब हो चुके हैं। गांव से लेकर शहर तक जल संरक्षण की कहानी सिर्फ ‘झूठे आंकड़ों पर टिकी’ है !

जल संरक्षण ‘घोटाला’: पुरस्कार की चकाचौंध में डूबे हजारों तालाब, आंकड़ों की माया उजागरदरअसल, पिछले दो वर्षों में हुए सर्वे में चौंकाने वाले खुलासे हुए। 602 तालाब तो ऐसे हैं जो प्रशासन की तमाम कोशिशों के बावजूद “ढूंढे से भी नहीं मिले।” बताया जाता है कि कई पुराने तालाबों की महज मरम्मत कराकर उन्हें “नया” बताकर आंकड़ों में शामिल किया गया और इसी खेल के आधार पर जिले को राष्ट्रीय जल संरक्षण पुरस्कार दे दिया गया।

जल संरक्षण 'घोटाला': पुरस्कार की चकाचौंध में डूबे हजारों तालाब, आंकड़ों की माया उजागरबांदा शहर के हृदयस्थल में मौजूद प्रागी तालाब, कंधरदास तालाब, छाबी तालाब और परशुराम तालाब बदहाली के प्रतीक बन चुके हैं।  छाबी तालाब बच्चों के खेल का मैदान बन गया हैं। कभी संस्कृति, समाज और पर्यावरण की धड़कन रहे ये तालाब अब अतिक्रमण और उपेक्षा की बलि चढ़ चुके हैं।

जल संरक्षण ‘घोटाला’: पुरस्कार की चकाचौंध में डूबे हजारों तालाब, आंकड़ों की माया उजागरन तो इनकी साफ-सफाई हो रही, न ही कोई संरक्षण योजना जमीन पर दिखाई देती है। मटौंध नगर और ग्रामीण इलाकों में भी हालात यही हैं। तालाब सूख चुके हैं, कई में निर्माण कार्य कर कब्जा कर लिया गया है। मनरेगा के तहत खोदे गए कई तालाब भी कागजों पर ही सीमित रहे। वहीं, सपा शासन काल की खेत-तालाब योजना भी धरातल पर बेहद कमजोर दिखी। एक रिपोर्ट के अनुसार, 2012 तक बुंदेलखंड के 2069 पारंपरिक तालाब राजस्व रिकॉर्ड से गायब हो चुके थे।

जल संरक्षण 'घोटाला': पुरस्कार की चकाचौंध में डूबे हजारों तालाब, आंकड़ों की माया उजागरशासन द्वारा तय की गई जल संरक्षण की गाइडलाइन की सरेआम अनदेखी की गई। ग्राम पंचायतों के “अमृत सरोवर” के नाम पर कई तालाबों को केवल रंग-रोगन कर पेश किया गया। न गुणवत्ता की जांच हुई, न स्थायी समाधान की सोच दिखाई दी। बांदा को जल संरक्षित जिला कहकर भले ही पुरस्कारों की सूची में ऊपर रखा गया हो, लेकिन हकीकत में यहां जल संकट के बीज गहरे बोए जा चुके हैं।

 
 



Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh
 





 

Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh
 
Subscribe to us on Youtube to watch the latest video news updates.

Notice: This report has been updated by City News Uttar Pradesh Desk, . Full responsibility for the content of this report rests with City News Uttar Pradesh Desk. Neither www.citynewsuttarpradesh.in nor the Editorial Board bears any responsibility.

Related News

चोरों ने किया ऐसा काम कि आर्थिक तंगी से जूझ रहे व्यापारी की भर आईं आंखें

City News Uttar Pradesh

चित्रकूट मंडल के नये मंडलायुक्त होंगे बालकृष्ण त्रिपाठी :कुशल प्रशासक के रूप में है पहचान

City News Uttar Pradesh

बांदा में भारत बंद बेअसर : बसपा एवं भीम आर्मी नें किया विरोध प्रदर्शन, दिया ज्ञापन

City News Uttar Pradesh

डीएम आनंद नें समीक्षा बैठक में ली जानकारी, दिये जरूरी निर्देश ! …

City News Uttar Pradesh

शिक्षा के नाम पर “लूट” के खिलाफ कांग्रेस का हल्ला बोल: कार्रवाई की मांग

City News Uttar Pradesh

दर्दनाक वारदात : कलयुगी बेटे ने प्लाट नाम नहीं करने पर मां को कुल्हाड़ी से काट डाला, हत्या कर हुआ फरार, पुलिस कर रही जांच

ब्रेकिंग न्यूज़