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उद्योग 'बंधु' की बैठक फिर बनी खानापूर्ति का अड्डा: अफसर कागजों में दौड़ा रहे 'विकास'
उत्तर प्रदेशबुंदेलखंड

उद्योग ‘बंधु’ की बैठक फिर बनी खानापूर्ति का अड्डा: अफसर कागजों में दौड़ा रहे ‘विकास’

शरद मिश्रा सम्पादक सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश

  • शरद मिश्रा

बांदा। उद्योग बंधु की बैठक का नाम सुनते ही उद्यमियों के चेहरे पर उम्मीद से ज्यादा उबासियां आ जाती हैं। मंगलवार को बैठक में फिर वही पुराना ड्रामा दोहराया गया ! डीएम अमित आसेरी नें ‘समीक्षा’की, निर्देश’ दिए गए, ‘प्रतिबद्धता’ जताई गई। लेकिन जमीन पर सवाल वही, आवंटित भूखंड पर कब्जा कब मिलेगा? बैठक में मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना, ओडीओपी, ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट, सबकी समीक्षा हुई। भूरागढ़ में पेयजल नहीं, सड़क टूटी,नाली चोक,बिजली ट्रिपिंग से मशीनें बंद। उद्यमियों ने रोना रोया,अफसरों ने नोट किया। हर महीने यही स्क्रिप्ट, यही डायलॉग

उद्योग 'बंधु' की बैठक फिर बनी खानापूर्ति का अड्डा: अफसर कागजों में दौड़ा रहे 'विकास'उद्यमी आशीष कुमार साहू यूपीसीडा के आवंटित भूखंड डी-46 और डी-47 पर कब्जे के लिए आवेदन लेकर घूम रहे हैं। सुधा राजा डी-45 पर कब्जा मांग रही हैं। आवंटन हो गया, पैसा जमा हो गया, लेकिन कब्जा देने में विभाग के बाबुओं के पसीने छूट रहे हैं। मुख्य मुद्दा यह कि जब जमीन देनी ही नहीं थी तो आवंटन का ढोंग क्यों? मोहम्मद अंबर का ऋण बैंक ने रोक रखा है। अब डीएम ने कहा ‘प्राथमिकता पर निस्तारण कराएं’। मतलब अब तक प्राथमिकता नहीं थी।

उद्योग 'बंधु' की बैठक फिर बनी खानापूर्ति का अड्डा: अफसर कागजों में दौड़ा रहे 'विकास'फायर एनओसी के लिए ऑनलाइन पोर्टल का ज्ञान दिया गया। मिनी औद्योगिक संस्थान के बंद भूखंडों पर ‘निरीक्षण’ का झुनझुना पकड़ा दिया। डीएम ने कहा ‘एक भी प्रकरण लंबित न रहे’। यह डायलॉग हर उद्योग बंधु बैठक में सुनने को मिलता है। लेकिन हकीकत ये है कि उद्यमी कब्जे के लिए सालों भटकते हैं। भूरागढ़ में अतिरिक्त गेट,स्वतंत्र फीडर की मांग वर्षों से फाइलों में धूल फांक रही है। कताई मिल के भूखंड आवंटन पर ‘समीक्षा’ ही चल रही है।

उद्योग 'बंधु' की बैठक फिर बनी खानापूर्ति का अड्डा: अफसर कागजों में दौड़ा रहे 'विकास' ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में एमओयू साइन हो गए। फोटो खिंच गई। लेकिन जमीन पर उद्यमी को बिजली, पानी, सड़क और कब्जा तक नसीब नहीं। ‘निवेश को बढ़ावा’ का नारा तब तक खोखला है जब तक आवंटित प्लॉट पर उद्यमी फैक्ट्री न लगा पाए। जब उद्दोग विभाग कब्जा नहीं दे सकता, बैंक लोन नहीं देता, बिजली विभाग फीडर नहीं लगाता, तो उद्योग बंधु की बैठक में होता क्या है। चाय-समोसा, फोटो सेशन और अगली तारीख। डीएम साहब ‘आपसी समन्वय’ का निर्देश हर बार देते हैं। इस बार समन्वय जमीन पर दिखाइएवरना उद्यमी समझ जाएंगे कि उद्योग बंधु मतलब ‘उम्मीदों का बंधुआ’। आवंटन की रसीद लेकर कब्जे का इंतजार करते-करते उद्यम की उम्र ही न निकल जाए।

 
 



Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh
 





 

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