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October 11, 2026
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बांदा में 'हरित घोटाले' का सूखा: 64 लाख पौधे रोपे, 32 लाख कागज पर 'शहीद'
उत्तर प्रदेशबुंदेलखंड

प्यासे हलक, चमचमाती गाड़ियां’: बांदा में जलस्तर ‘आईसीयू’ में और अवैध धुलाई सेंटर ‘फुल’

विनोद मिश्रा डायरेक्टर सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश

  • विनोद मिश्रा

बांदा। जिले में ‘हाय पानी-हाय पानी’ का शोर है, हैंडपंप ‘सांस तोड़’ रहे हैं और भूजल ‘पाताल लोक’ की यात्रापर निकल चुका है। मगर जिला मुख्यालय से लेकर तहसील-कस्बों तक गली-गली में खुले अवैध वाहन धुलाई सेंटरों में रोजाना हजारों लीटर पीने योग्य पानी ‘प्रेशर’ के साथ नाली में बहाया जा रहा है। यानी एक तरफ जनता ‘मटका लेकर लाइन’ में है, दूसरी तरफ गाड़ियां ‘शैंपू-साबुन’ से रोज नहा रही हैं।

प्यासे हलक, चमचमाती गाड़ियां': बांदा में जलस्तर 'आईसीयू' में और अवैध धुलाई सेंटर 'फुल'जिला मुख्यालय में पीली कोठी, कालू कुँआ, चिल्ला रोड, केवटरा केन रोड हर मोहल्ले में ‘वाहन स्नानघर’ सज गए हैं। अतर्रा में बदौसा, बिसंडा, ओरन सड़कों और बांदा-प्रयागराज राष्ट्रीय राजमार्ग पर भी यही ‘वॉशिंग महाकुंभ’ चल रहा है। इन सेंटरों पर रोज 30 से सौ तक छोटे-बड़े वाहन और बाइक ‘फव्वारे’ के नीचे चमकाए जाते हैं। एक कार पर 100-150 लीटर पानी बह जाता है, हिसाब लगाओ तो रोजाना हजारों लीटर ‘बिसलेरी’ सीधे गटर में।

प्यासे हलक, चमचमाती गाड़ियां': बांदा में जलस्तर 'आईसीयू' में और अवैध धुलाई सेंटर 'फुल'भीषण गर्मी में जब जल बोर्ड ‘पानी बचाओ’ के पोस्टर चिपका रहा है, तब ये अवैध सेंटर बोरिंग से ’24×7 मुफ्त जलसेवा’ चला रहे हैं। न लाइसेंस,न वाटर मीटर, न रिसाइकिलिंग का झंझट बस पाइप लगाओ और ‘राज्य जल बोर्ड के नियमों’ को धो डालो। सरकारी नियम-कायदे तो कब के ‘प्रेशर पाइप’ से धुलकर बह चुके हैं। मजे की बात ये कि अफसरों की गाड़ियां भी इन्हीं धुलाई सेंटरों के सामने से ‘धूल उड़ाती’ निकलती हैं, पर ‘पानी की बर्बादी’ का सीन उनकी ‘एसी वाली नजर’ से ओझल रहता है।

प्यासे हलक, चमचमाती गाड़ियां': बांदा में जलस्तर 'आईसीयू' में और अवैध धुलाई सेंटर 'फुल'जनता पूछ रही है कि जब घर में ‘घूंट-घूंट’ को तरस रहे हैं, तो गाड़ियों को ‘रोजाना शाही स्नान’ कौन करा रहा है? क्या जल संरक्षण अभियान सिर्फ ‘सेमिनार की चाय’ तक सीमित है? फिलहाल बांदा में नया जल-सूत्र चल रहा है ‘जल है तो वाहन कल है’। अगर अवैध धुलाई सेंटरों पर ‘चालान का प्रेशर’ नहीं पड़ा तो अगली गर्मी में लोग पूछेंगे “पानी पहले सूखा था या प्रशासन की कलम?” और तब तक शायद हर चौराहे पर ‘हाय पानी’ की जगह ‘था पानी’ का बोर्ड टंग चुका होगा।

 
 



Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh
 





 

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