
- शरद मिश्रा
बांदा। पांच हजार 121 करोड़ की “केन-बेतवा लिंक परियोजना” में बांदा जिला सबसे “अहम कड़ी” बनकर उभरा है। यहां नहरों का काम युद्धस्तर पर चल रहा है, लेकिन सिंचाई की सबसे बड़ी उम्मीद यानी दो नए बैराज की फाइलें अभी केंद्रीय जल आयोग में अटकी हैं।
जिले में 113 करोड़ की लागत से बड़ी नहरों का जीर्णोद्धार शुरू हो चुका है। साथ ही 168 छोटी नहरों के लिए 119 करोड़ का टेंडर 10 दिन पहले ही पूरा हुआ है। कुल 232 करोड़ से 170 से ज्यादा नहरों की सूरत बदलेगी। अंग्रेजों के जमाने में सन् 1905 में बने केन नदी कैनाल सिस्टम को नए सिरे से तैयार किया जाएगा। यूपी के हिस्से में पड़ने वाले करीब 24 किमी के जर्जर सिस्टम को दुरुस्त करना सबसे बड़ी चुनौती है।
केन नदी पर बांदा और पैलानी में दो नए बैराज प्रस्तावित हैं। इनके बनने से पाइपलाइन के जरिए 25,504 हेक्टेयर खेतों तक पानी पहुंचेगा। फिलहाल दोनों बैराज की फाइल सीडब्लूसी में स्वीकृति के लिए लंबित है। परियोजना में बरियारपुर पिकअप, पारीक्षा और बरुआसागर बांध का भी जीर्णोद्धार कराया जाना है। इससे जल भंडारण क्षमता बढ़ेगी और नहरों में पानी की आवक सुनिश्चित होगी।
पिछले साल बांदा-महोबा में जमीनी सतह का विस्तृत “टोपोग्राफिकल सर्वे” कराया गया था। इसी सर्वे के आधार पर बांदा जिले की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार की गई है। अधिकारियों के मुताबिक जल आयोग से बैराज की मंजूरी मिलते ही काम शुरू कर दिया जाएगा। इससे जिले के हजारों किसानों को सीधा फायदा मिलेगा।
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