
- विनोद मिश्रा
बांदा। विश्व का अजेय किला कालिंजर नें फिर फतेह का ध्वज लहरा दिया। भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने कालिंजर किले की पहाड़ी को राष्ट्रीय भू-विरासत स्थल घोषित कर इसकी महिमा को बुलंदियों पर पहुंचा दिया। यह बुलंद मान्यता 16 मार्च को राजिंदर कुमार अपर महानिदेशक इसे दे चुके हैं। कालिंजर किला अपनी सांस्कृतिक विरासत के लिए जाना जाता है,लेकिन अब यह भूवैज्ञानिक घटना “एपार्कियन अनकॉन्फ़ॉर्मिटी” के लिए भी प्रसिद्ध हो रहा है। यह स्थल पृथ्वी के सुदूर अतीत की जानकारी प्रदान करता है और चट्टानों के बीच के संपर्क बिंदु को स्पष्ट रूप से देखता है।

यहाँ आर्कियन-प्रोटेरोज़ों युग की गुलाबी-लाल बुंदेलखंड ग्रेनाइट चट्टानें हैं, जिनके ऊपर 1.2 अरब वर्ष पुरानी कैमूर बलुआ पत्थर की परत है। इसके बीच की एपार्कियन अनकॉन्फ़ॉर्मिटी पृथ्वी के इतिहास का एक बड़ा अध्याय दर्शाती है। कालिंजर का भू-सांस्कृतिक परिदृश्य एक अद्वितीय उदाहरण है। यहाँ की मेज़नुमा पहाड़ी ने एक रणनीतिक रक्षात्मक स्थिति प्रदान की है। इसके निर्माण के लिए स्थानीय ग्रेनाइट और बलुआ पत्थर का उपयोग किया गया। खजुराहो यूनेस्को विश्व धरोहर और चित्रकूट जैसे धार्मिक स्थलों के निकटता कालिंजर को भू-पर्यटन का एक प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में मदद करेगी। यहाँ की प्राकृतिक खूबसूरती शोधकर्ताओं और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है।
![Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh](https://citynewsuttarpradesh.in/wp-content/uploads/2026/05/file_0000000055a072089a09490a85573f53-683x1024.png)
![Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh](https://citynewsuttarpradesh.in/wp-content/uploads/2026/05/file_00000000022872078732ec3f33441b29.png)
Notice: This report has been updated by Admin Team, . Full responsibility for the content of this report rests with Admin Team. Neither www.citynewsuttarpradesh.in nor the Editorial Board bears any responsibility.
