
- विनोद मिश्रा
बांदा। बुंदेलखंड की धरती पर चल रहा “खनन खेल” अब देश के सबसे “बड़े घोटालों” में शामिल होने की ओर “बढ़” रहा है। यह सिर्फ “अवैध खनन” नहीं है, यह एक “सुनियोजित लूट” है। यह “सिस्टम की नाकामी” नहीं बल्कि “सिस्टम की मिलीभगत” की “कहानी” है।

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की ताज़ा रिपोर्ट ने जो खुलासे किए हैं, वे न सिर्फ चौंकाने वाले हैं, बल्कि पूरे प्रशासनिक ढांचे को कठघरे में खड़ा करते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक बांदा, चित्रकूट और हमीरपुर जनपद अवैध खनन के मामले में प्रदेश के शीर्ष पर पहुंच गए हैं।

कैग की रिपोर्ट के अनुसार, इन जिलों में खनन पट्टा क्षेत्र से बाहर बड़े पैमाने पर अवैध खनन किया गया। बांदा जनपद में छह खदानों में 45.48 हेक्टेयर क्षेत्र में पट्टा सीमा से बाहर खनन पाया गया। वहीं चित्रकूट में चार खदानों में 34.29 हेक्टेयर और हमीरपुर में 11 खदानों में 62.91 हेक्टेयर क्षेत्र में अवैध खनन की पुष्टि हुई है।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि चित्रकूट की एक खदान में 14.90 हेक्टेयर क्षेत्र में बिना किसी वैध पट्टे के ही खनन किया गया। इसी तरह हमीरपुर की तीन खदानों में 6.18 हेक्टेयर क्षेत्र में भी बिना अनुमति के खनन सामने आया है। रिपोर्ट में खनिज विभाग की गंभीर लापरवाही और संभावित मिलीभगत का भी खुलासा हुआ है। मौरंग और पत्थर के कारोबारियों के दबाव या आर्थिक लेन-देन के चलते विभाग ने ढुलाई के लिए ऐसे वाहनों को भी परमिट जारी कर दिए, जो इस कार्य के लिए पूरी तरह अनुपयुक्त हैं।

इनमें एंबुलेंस, ई-रिक्शा, बाइक, कार और यहां तक कि बुलडोजर जैसे वाहनों के नंबर शामिल हैं। नियमों के विरुद्ध इन वाहनों से प्रतिदिन 1 से लेकर 122 चक्कर तक ढुलाई दर्शाई गई, जो स्पष्ट रूप से फर्जीवाड़े की ओर इशारा करता है। कैग रिपोर्ट के अनुसार, केवल तीन ही नहीं बल्कि बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर और महोबा समेत कुल 11 जिलों में इस प्रकार के अनाधिकृत वाहनों को खनिज ढुलाई के लिए परमिट जारी किए गए। इससे यह साफ होता है कि अवैध खनन का यह नेटवर्क व्यापक और संगठित है।

इस अवैध खनन से जहां एक ओर सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ, वहीं दूसरी ओर पट्टाधारक और खनन माफिया रातों-रात मालामाल हो गए। रिपोर्ट में इस पूरे प्रकरण को प्रशासनिक विफलता और निगरानी तंत्र की कमजोरी का परिणाम बताया गया है। कैग की रिपोर्ट सामने आने के बाद अब इस पूरे मामले में उच्चस्तरीय जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग तेज हो गई है।
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