
- विनोद मिश्रा
बांदा। बुंदेलखंड में जल जीवन मिशन की ‘जमीनी हकीकत’ सरकार के ‘दावों से उलट’ नजर आ रही है। योजनाओं में ‘खामियों और धीमी प्रगति’ को लेकर जल शक्ति राज्य मंत्री रामकेश निषाद ‘नाराज’ हैं! उन्होंने चित्रकूट मंडल में ‘जल जीवन मिशन’ की नये सिरे से ‘व्यापक समीक्षा’ का ‘ऐलान’ किया है। मंत्री ने साफ कर दिया है कि ‘लापरवाह अधिकारियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। ‘दोषी’ पाए जाने पर ‘निलंबन की कार्रवाई’ तय है।

तीन दिन पूर्व महोबा में जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह और महोबा जिले के भाजपा विधायक बृजभूषण राजपूत के बीच जल जीवन मिशन की खामियों को लेकर हुई तीखी झड़प ने बुंदेलखंड में योजना की सफलता के सरकारी दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं !

यह विवाद इस बात का संकेत है कि योजना के क्रियान्वयन में कहीं न कहीं बड़ी चूक हुई है। चित्रकूट मंडल से मिल रही शिकायतों के अनुसार बांदा, महोबा, हमीरपुर और चित्रकूट चारों जिलों में जल जीवन मिशन का कार्य अब तक सिर्फ 50 से 60 प्रतिशत ही पूरा हो पाया है। कई इलाकों में स्थिति इससे भी अधिक चिंताजनक बताई जा रही है।

महोबा जिले के चरखारी विधानसभा क्षेत्र के ग्राम भरवारा में घरों में नल कनेक्शन तो दे दिए गए हैं, लेकिन पूरे गांव में पानी नहीं पहुंच रहा। वहीं ग्राम बमरारा में योजना के दौरान की गई खुदाई के बाद मुख्य सड़क से गांव के अंदर तक सीसी सड़क दो वर्षों से उखड़ी पड़ी है, जिससे ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि जिले में शायद ही कोई ऐसा गांव हो जहां यह योजना लोगों को ‘रुला’ न रही हो।

चित्रकूट जिले में 1132 करोड़ रुपये की लागत से चल रही सिलौटा, चांदी बांगर और रैपुरा ग्राम समूह पेयजल परियोजना की प्रगति भी बेहद धीमी है। वर्षों बाद भी केवल 30 प्रतिशत घरों में ही नल से पानी पहुंच सका है। हमीरपुर जिले में छह वर्ष बीतने के बावजूद करीब 30 प्रतिशत से अधिक घरों में अब तक जलापूर्ति शुरू नहीं हो सकी है। बांदा जिले में कार्य अंतिम चरण में होने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन नरैनी सहित 50 से अधिक गांवों में अभी केवल परीक्षण (ट्रायल रन) ही चल रहा है, जिससे ग्रामीणों में असंतोष है !

बांदा से विधायक एवं जल शक्ति राज्य मंत्री रामकेश निषाद ने चित्रकूट मंडल के सभी संबंधित अधिकारियों को सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि वे बाखबर हो जाएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे स्वयं गांव-गांव जाकर योजनाओं का स्थलीय निरीक्षण और समीक्षा करेंगे। जहां भी लापरवाही मिलेगी, वहां जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई होगी।
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