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हनुमंत कथा तीसरा दिन: पराक्रम, भक्ति व बुद्धि का बना संगम, अर्जियां स्वीकार का चमत्कार
उत्तर प्रदेश

हनुमंत कथा तीसरा दिन: पराक्रम, भक्ति व बुद्धि का बना संगम, अर्जियां स्वीकार का चमत्कार

शरद मिश्रा सम्पादक सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश

  • शरद मिश्रा

बांदा। हनुमंत कथा के तीसरे दिन बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने दिव्य दरबार में भक्तों को हनुमान जी के अद्भुत पराक्रम और भगवान राम के प्रति उनकी अटूट भक्ति के प्रसंग सुनाकर मंत्रमुग्ध कर दिया। इस अवसर पर “अर्जियां स्वीकार करने का चमत्कार” कार्यक्रम भी आयोजित किया गया, जिसमें भक्तों ने अपने जीवन की परेशानियों और प्रार्थनाओं को हनुमान जी के चरणों में प्रस्तुत किया।

हनुमंत कथा तीसरा दिन: पराक्रम, भक्ति व बुद्धि का बना संगम, अर्जियां स्वीकार का चमत्कार

शास्त्री जी ने कथा में हनुमान जी के संकटों से निकलने की कला पर विशेष जोर दिया। उन्होंने सुरसा माता से मुकाबला, समुद्र पार करना और जयंत जैसे प्रसंगों के माध्यम से बताया कि हनुमान जी ने हर परिस्थिति में अपनी “शक्ति और बुद्धि” का इस्तेमाल किया। उदाहरण स्वरूप, उन्होंने कहा कि जब हनुमान जी को सुरसा माता का विशाल मुख देखकर छोटा रूप धारण करना पड़ा, तब उन्होंने धैर्य और बुद्धि से काम लिया और सफल हुए।

हनुमंत कथा तीसरा दिन: पराक्रम, भक्ति व बुद्धि का बना संगम, अर्जियां स्वीकार का चमत्कार

साथ ही उन्होंने अर्जुन और हनुमान जी के बीच हुए प्रसंग का जिक्र किया, जहां हनुमान जी ने पुल को अपनी असीम शक्ति से मजबूत बनाया, जिससे उनके भक्तों को यह सिखने को मिला कि संकट के समय साहस, भक्ति और बुद्धि का संयोजन ही सफलता दिलाता है।

हनुमंत कथा तीसरा दिन: पराक्रम, भक्ति व बुद्धि का बना संगम, अर्जियां स्वीकार का चमत्कार

भक्ति और समर्पण पर जोर देते हुए पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि हनुमान जी ने राम जी के कार्य को पूर्ण करने के लिए हर चुनौती को स्वीकार किया और निस्वार्थ भाव से सेवा की। उन्होंने भक्तों से अनुरोध किया कि वे भी हनुमान जी से प्रेरणा लेकर संकटों का सामना करें, बड़ों का सम्मान करें और निस्वार्थ सेवा का मार्ग अपनाएं।

हनुमंत कथा तीसरा दिन: पराक्रम, भक्ति व बुद्धि का बना संगम, अर्जियां स्वीकार का चमत्कार

तीसरे दिन की कथा हनुमान जी के पराक्रम, बुद्धि और भक्ति के अद्भुत संगम पर केंद्रित रही, जिसने भक्तों को न केवल राम और हनुमान जी के प्रति भक्ति की प्रेरणा दी, बल्कि जीवन में सफल होने और ईश्वर के निकट जाने का मार्ग भी दिखाया। कथा के अंत में भक्तों ने प्रार्थना की कि हनुमान जी की शक्ति और भक्ति उनके जीवन में भी “समाहित” हो।

 

 

 

Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh

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