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ठेकेदार सुरेश 'सिस्टम' का 'सुपर माफिया' ? करोड़ों के 'मानक विहीन' काम, डीएम, सीएम के लिये चुनौती ?
उत्तर प्रदेश

ठेकेदार सुरेश ‘सिस्टम’ का ‘सुपर माफिया’ ? करोड़ों के ‘मानक विहीन’ काम, डीएम, सीएम के लिये चुनौती ?

विनोद मिश्रा डायरेक्टर सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश

  • विनोद मिश्रा

बांदा। जिले का ठेकेदार सुरेश गुप्ता ऐसा कथित “नाम” बन चुका है जिसने “अफसरशाही से लेकर कई जनप्रतिनिधियों” तक को “अपने प्रभाव की बेड़ियों” में “जकड़” रखा है ? यह ठेकेदार-कभी आम ठेकेदार रहा, पर आज पूरे सिस्टम पर ऐसे “हावी” बताया जाता है जैसे वह सिर्फ ठेके नहीं, पूरा “तंत्र” चला रहा हो? सूत्रों की मानें तो “यह वही ठेकेदार” है जिसे जिले में “सिस्टम का रिमोट कंट्रोल” कहा जाता है? आरोप हैं कि जिले की कई कार्यदायी संस्थाओं में छोटे से छोटे इंजीनियर से लेकर ऊपर “बैठे बड़े अधिकारियों” तक उसकी “मर्जी” और “मन” से चलतें हैं।

ठेकेदार सुरेश 'सिस्टम' का 'सुपर माफिया' ? करोड़ों के 'मानक विहीन' काम, डीएम, सीएम के लिये चुनौती ?

सूत्रों की सच मानें तो जब यह ठेकेदार “तरन्नुम” में आता है तो कथित तौर पर एक लाइन अक्सर गुनगुनाता है “नाच मेरी बुलबुल, तुझे पैसा मिलेगा मेरे जैसा कद्रदान तुमको कहां मिलेगा !” यह जुमला अब सिस्टम में फैल चुके प्रभाव का सूचक सा बन गया है? विभागीय कर्मचारियों और अधिकारियों पर आरोप है कि वे काम के बदले इस ठेकेदार से “मुंहमांगा वरदान” मांगते हैं। “जो मांगा, वो मिला !”

डीएम जे रीभा नें बताया:अब खतौनियों में गाटावार होगा अंश निर्धारण,गांव वार लाक व्यवस्था बंद

जिले की चर्चाओं में “बार-बार” उठ रहा सवाल “क्या डीएम जे. रीभा इस कथित भ्रष्ट साम्राज्य का सच सामने ला पाएंगी ?” जागरूक नागरिकों व सूत्रों का कहना है कि डीएम यदि जिले की सभी कार्यदायी संस्थाओं से सुरेश गुप्ता को दिए गए कार्यों का 5 साल का ही पूरा ब्योरा निकलवा कर तकनीकी जांच करा दें तो,”गुणवत्ता शर्मसार” दिखेगी, “भुगतान संदिग्ध नज़र” आएंगे, अधीनस्थ कर्मचारी और “इंजीनियर गले तक फंसे” दिखाई देंगे ? पूरा “सिस्टम सिंडिकेट” बेनकाब हो जाएगा ?

ठेकेदार सुरेश 'सिस्टम' का 'सुपर माफिया' ? करोड़ों के 'मानक विहीन' काम, डीएम, सीएम के लिये चुनौती ?

जनता का आरोप है कि इस ठेकेदार ने योगी सरकार की सख्त छवि और जीरो टॉलरेंस नीति की परवाह किए बिना “गुणवत्ता विहीन निर्माण” करके सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाया है ? अगर सीबीआई जैसी स्वतंत्र एजेंसी से तकनीकी जांच करा दी जाए तो ये ठेकेदार और उसके समर्थक “अफसर-इंजीनियर” सीधे जेल में मिलेंगे ! इस पूरे प्रकरण ने जिले की राजनीति, अफसरशाही और ठेकेदारी पर एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है ! सूत्रों के मुताबिक जिले में चर्चा है कि डीएम जल्द ही इस ठेकेदार के पुराने कार्यों का विवरण मंगवा सकती हैं। अगर ऐसा हुआ तो बांदा का सबसे “बड़ा निर्माण घोटाला उजागर” होने की उम्मीद जताई जा रही है।

 

 

 

 

 

Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh

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