
- शरद मिश्रा
बांदा। बुंदेलखंड की राजनीति में इन दिनों एक नया चेहरा तेजी से उभर रहा है। यह हैं ‘भाजपा नेता प्रवीण सिंह’। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की वैचारिक और संगठनात्मक भूमि से निकले इस युवा नेता ने अपनी सक्रियता, ऊर्जा और जमीनी जुड़ाव से राजनीतिक हलकों में खास पहचान बनाई है।

उनकी पहचान केवल एक भाजपा नेता की नहीं, बल्कि एक युवा प्रेरक, सामाजिक कार्यकर्ता और सांस्कृतिक वाहक के रूप में भी तेजी से बन रही है। प्रवीण सिंह का राजनीतिक सफर सिर्फ सत्ता या पद पाने की कहानी नहीं है।

यह कहानी है उस विचारधारा की, जिसमें “राष्ट्र प्रथम” का भाव सर्वोपरि है। संघ के अनुशासन, सेवा और संगठन की शिक्षा ने उनके भीतर समाज के प्रति एक गहरी संवेदना विकसित की है। इसी सोच को उन्होंने राजनीति और समाजसेवा के संगम में ढाल दिया है।

बुंदेलखंड के युवाओं को आत्मनिर्भर और राष्ट्रनिर्माण की दिशा में अग्रसर करने के लिए प्रवीण सिंह चौहान ने “बुंदेलखंड यूथ फाउंडेशन” की स्थापना की। यह संगठन अब युवाओं की आवाज़ बन चुका है। रोजगार, कौशल विकास, सामाजिक भागीदारी और सांस्कृतिक चेतना के क्षेत्र में इस फाउंडेशन की भूमिका तेजी से बढ़ी है। प्रवीण सिंह के नेतृत्व में बुंदेलखंड का युवा अब सिर्फ दर्शक नहीं, बल्कि बदलाव का सहभागी बन चुका है।

प्रवीण सिंह की कार्यशैली पारंपरिक राजनीति से अलग है। वे जुलूस और भाषणों की बजाय संवाद, भागीदारी और सेवा कार्यों पर अधिक ध्यान देते हैं। चाहे युवाओं को रोजगार प्रशिक्षण से जोड़ना हो या ग्रामीण इलाकों में स्वच्छता और शिक्षा अभियान चलाना। उन्होंने हर जगह अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज की है। उनका लक्ष्य है विकसित बुंदेलखंड,सशक्त युवा और संस्कारित समाज।

प्रवीण सिंह केवल राजनीति तक सीमित नहीं हैं। वह बुंदेलखंड की समृद्ध लोकसंस्कृति, परंपरा और गौरवशाली इतिहास को भी पुनर्जीवित कर रहे हैं। उनकी पहल पर “बुंदेलखंड गौरव उत्सव”, “युवा संवाद शिविर” और “संस्कृति संगम” जैसे आयोजनों ने क्षेत्र में नई चेतना जगाई है। वह मानते हैं कि संस्कृति ही समाज की आत्मा है और जब आत्मा जागती है तो समाज बदलता है।

बांदा से शुरू हुई उनकी सक्रियता अब महोबा, चित्रकूट, हमीरपुर, झांसी और जालौन, ललित पुर तक फैल चुकी है। युवाओं के बीच उनका प्रभाव तेजी से बढ़ा है। जहां वे जाते हैं, वहां संवाद, प्रेरणा और ऊर्जा का माहौल बन जाता है। उनका साफ संदेश है राजनीति सेवा का माध्यम है, सत्ता का साधन नहीं।

प्रवीण सिंह अब एक सशक्त और गंभीर नेता के रूप में देखे जा रहे हैं। उनकी लोकप्रियता, संगठन कौशल और जनता से जुड़ाव ने उन्हें युवाओं का चहेता बना दिया है। उनकी छवि एक विचारशील, विनम्र और कर्मठ नेता की है जो अपने आचरण से राजनीति में नई दिशा देने का प्रयास कर रहे हैं।
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