- विनोद मिश्रा
बांदा : मधुमक्खी का कुल एवं गुणवत्तायुक्त उत्पादन मे महत्वपूर्ण भूमिका है। मानव सभ्यता से लेकर अब तक मधुमंक्खी के प्राकृतिक विकाश के लिये हम सतत प्रयासरत है। इस दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का मुख्य उदेदश्य भी यही है कि मधुमक्खी पालन को सुगम कैसे बनाया जाय तथा इसके सत्त विकास, संभावनाये तथा इसमे आने वाली सभी चुनौतीयो का हल कैसे निकालते है। यह बाते ए आई सी आर पी हनी बी एण्ड पौलीनेटर के प्रोजेक्ट को आर्डिनेटर रहे डा0 बलराज सिंह ने कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, बाँदा में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना द्वारा वित्त पोषित परियोजना के अन्तर्गत “भारत में मधुमक्खी पालन का सत्त विकास, संभावना, चुनौती, रणनीति एवं भावी दिशा“ विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के दूसरे दिन 24 मार्च 2021 को बतौर मुख्य अतिथि कही। डा0 सिंह ने प्रतिभागियों से मधुमक्खी पालन की वैज्ञानिक विधियों पर विस्तारपूर्वक चर्चा की और जिज्ञासु किसानो के मधुमक्खी पालन से सम्बन्धित प्रश्नांे एवं समस्याओं का समाधान भी बताया।

कार्यक्रम कें विशिष्ट अतिथी डा0 नीरज कुमार सिंह सह प्रध्यापक राजेन्द्र कृषि वि0 वि पूसा, समस्तीपुर बिहार, ने मधुमक्खी पालन व्यवसाय के भविष्य की योजनाओ एवं उस पर किये जाने वाले कार्याे की चर्चा की। डा0 नीरज ने अपने व्याखान मे कहा कि भविष्य मे अधिक अन्न उत्पादन तभी सम्ंभव है जब हम मधुमक्खीं पालन को व्यापक स्तर पर कर सके। इ0सी0सी0 कालेज इलाहाबाद के जन्तु विज्ञान विभाग की सहायक प्राध्यापक डा0 निशी सेवक ने मधुमक्खी एंव उसके पालन का जन्तु जगत मे पडने वाले प्रभाव के बारे मे विस्तार से बताया और कहा कि वर्तमान समय में देश ही नही विदेशो मे भी शहद की माग बढी है, जो हमारे लिये अच्छा सूचक है। इस दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में कुल पाॅच तकनिकी सत्र हुये जिसमें देश के नामचिन संस्थानो के मधुमक्खी पर कार्य कर रहे वैज्ञानिको के मुख्य प्रस्तुती हुयी। इस दौरान कुल सात प्रजेन्टेशन कराये गये जिसमे से पाच का आनलाइन प्रस्तुतीकरण देश के विभिन्न संस्थानो में कार्यरत वैज्ञानिको के द्वारा किया गया।

संगोष्ठी के आयोजक सचिव एवं मधुमक्खी परियोजना प्रधान अनवेषक डा ए0 के0 सिंह द्वारा बुन्देलखण्ड मे मधुमक्खी पालन की संम्भावनाये एवं उससे सम्बन्धित चुनौतियो पर विस्तार से चर्चा कि। दहलन और तिलहन का क्षेत्र होने के कारण यहां मधुमक्खी पालन की आपर संभावनाएं है। डा सिंह ने बताया की इस सगोष्ठी का मुख्य उदे्दश्य बुन्देलखण के कृषको मे मधुमक्खी पालन मे एवं उससे होने वाली आय एवं रोजगार के बारे मे जागरूकता लाना है। इस सगोष्ठी मे लगभग 100 कृषको के साथ साथ कुल 250 लोगो ने प्रतिभाग किया। डा0 विज्ञा मिश्रा, सहायक प्राध्यापक, पोस्ट हरवेस्ट टेक्नाॅलाजी ने शहद एवं मधुमक्खी पालन में उत्पादित हेाने वाले विभिन्न उत्पादो के मूल्य संवर्धन पर वित्तार से चर्चा की। डा0 मिश्रा ने यह भी बताया की मूल्य सर्वधन कर कैसे इस व्यवसाय से अधिक धन अर्जित किया जा सकता हेै।

सगोष्ठी के समापन समारोह में अधिष्ठाता कृषि प्रो0 जी एस पवंार, डा0 वी के सिंह, डा0 एस0 के0 सिंह, डा0 राकेश पाण्डेय, डा0 दिनेश गुप्ता, डा0 निधिका ठाकुर, डा0 चन्द्रकान्त तिवारी, डा0 धीरज मिश्रा, डा0 अमित मिश्रा की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कार्यक्रम का संचालन डा0 विज्ञा मिश्रा के द्वारा किया गया।

( शरद मिश्रा- संपादक )
( सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश )




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