- विनोद मिश्रा
बांदा। चित्रकूट मंडल में हर छठवां व्यक्ति हाइपरटेंशन की गिरफ्त में है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस बीमारी को साइलेंट किलर कहा जाता है। ऐसे में अगर समय पर बीमारी का इलाज न कराया जाए तो लकवा से लेकर हार्ट अटैक आने तक का खतरा रहता है। जब ऊपर वाला रक्तचाप 140 और नीचे वाला 90 से ज्यादा हो तो इसे हाइपरटेंशन कहते हैं।

मेडिकल कॉलेज के जन स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ.रमेश टीकेदार ने बताया कि इस बीमारी के 80 से 90 फीसदी मरीजों में कोई लक्षण नहीं दिखाई देते हैं। इस कारण इसे साइलेंट किलर भी कहा जाता है। कुछ मरीजों में सिर दर्द, चक्कर आना, आंखों से धुंधला दिखना, सांस फूलना, सीने में दर्द या भारीपन, कानों में सीटी बजना आदि लक्षण होते हैं। हाइपरटेंशन से बचने के लिए लोगों को अपनी आदत, खानपान में भी बदलाव करना होगा। उन्होंने बताया कि चित्रकूट मंडल में हर छठवां व्यक्ति इसकी चपेट में है। मेडिकल कालेज के वरिष्ठ फिजीशियन डॉ करण सिंह राजपूत ने बताया कि रोजाना ओपीडी में 25 फीसदी मरीज तो हाइपरटेंशन का ही इलाज कराने के लिए आते हैं। अनियंत्रित ब्लड प्रेशर से हार्ट अटैक या हार्ट फेल्योर का खतरा हो सकता है। स्ट्रोक, आंखों की रोशनी पर प्रभाव और हाथ-पैरों की नसों में ब्लॉकेज हो सकता है। जिन महिलाओं का गर्भावस्था में ब्लड प्रेशर बढ़ा रहा हो, उन्हें भी नियमित जांच करानी चाहिए।
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