- विनोद मिश्रा
बांदा। छात्र परिषद के अध्यक्ष मेधावी छात्र कल्याण सिंह के उत्पीड़न का मामला अब सिर्फ एक विवि विवाद नहीं, बल्कि “प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था की सड़ांध का एक खुला दस्तावेज़” बन चुका है। कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय में सब्जी विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो.अजीत सिंह पर लगाए गए मानसिक उत्पीड़न और भेदभाव के गंभीर आरोपों पर जब “राजभवन से जांच का आदेश” आया, तो विश्वविद्यालय “प्रशासन की पोल खुलनी” शुरू हो गई। लेकिन असली हैरानी तब हुई, जब आरोपों से घिरे उसी प्रोफेसर को प्रशासन ने “छात्र कल्याण अधिष्ठाता” बना डाला।

मामला विश्वविद्यालय के सब्जी विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर अजीत सिंह से जुड़ा है, जिन पर विश्वविद्यालय के छात्र परिषद अध्यक्ष कल्याण सिंह ने भेदभावपूर्ण व्यवहार, मानसिक उत्पीड़न, और पद के दुरुपयोग जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि जिन पर उत्पीड़न का आरोप है, उन्हीं को विश्वविद्यालय प्रशासन ने ‘छात्र कल्याण अधिष्ठाता’ जैसा संवेदनशील पद सौंप दिया। क्या “यह मात्र संयोग है या सुनियोजित संरक्षण” ?

कल्याण सिंह, जो न सिर्फ छात्र परिषद के अध्यक्ष हैं, बल्कि विभाग के मेधावी छात्र भी हैं, इन्होने 6 महीने पहले ही उत्पीड़न की शिकायत मानवाधिकार आयोग, राजभवन, जिलाधिकारी, और यूजीसी तक पहुंचाई थी। परंतु न जांच कमेटी बनी,न कोई कारण बताओ नोटिस जारी हुआ। उल्टा आरोपी को संवेदनशील पद पर बिठा दिया गया। क्या ये है छात्रों के ‘कल्याण’ का नया मॉडल ? राज्यपाल के विशेष सचिव द्वारा कुलपति को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि मामले की जांच कर अवगत कराएं। लेकिन बांदा “कृषि विवि प्रशासन की सुस्ती और चुप्पी चीख-चीख कर बता रही है कि पूरे सिस्टम ने आरोपी को बचाने की कसम” खा ली है। अब प्रश्न ये है क्या बांदा का यह विश्वविद्यालय “प्रशासनिक संरक्षण का अड्डा” बन चुका है ?

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अपर सचिव ने कुलसचिव प्रो. सुरेंद्र कुमार सिंह से जवाब मांगा कि शिकायत निवारण समिति में इतनी लापरवाही क्यों हुई ? शासन के निर्देश के अनुसार डीएम को 8 हफ्तों में जांच पूरी कर रिपोर्ट भेजनी थी, लेकिन समय बीत जाने के बाद भी जांच शुरू नहीं हो सकी क्यों ? क्या “विश्वविद्यालय अब न्याय का नहीं, न्याय की हत्या का अड्डा” बन गया है ? कल्याण सिंह ने कहा “मैं झुकूंगा नहीं” ! छात्रों में आक्रोश है। कुलपति से लेकर निदेशक तक, सब पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। छात्र नेता कल्याण सिंह ने बताया की मैंने मानवाधिकार आयोग को भी पत्र भेजा है। “यह लड़ाई मेरी नहीं, हर शोषित छात्र की लड़ाई है। मैं चुप नहीं बैठूंगा। अगर इंसाफ नहीं मिला तो विश्वविद्यालय को आंदोलन की आग में झोंक” दूंगा।
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