- विनोद मिश्रा
बांदा। यूपी के माफिया डान मुख्तार अंसारी को पिछले 24 वर्षों से लगातार मिला माननीय का तमगा पिछले 13 वर्षों से मुल्जिम और जेल के बंदी में बदला हुआ है। सदन (विधानसभा) से कहीं ज्यादा दिन जेल की बैरकों में बीत रहे हैं। ये अजब और गजब की स्थिति बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी की है। मुख्तार अंसारी पिछले 24 वर्षों से लगातार मऊ विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीतकर विधायक चुने जा रहे हैं। पहली बार वह 1996 के चुनाव में बसपा टिकट पर चुनाव जीते।

उसके बाद से अब तक हुए सभी पांच चुनावों में वह लगातार विधायक चुने जा रहे हैं। अभी भी बसपा से ही मौजूदा विधायक हैं। चूंकि अदालत ने किसी जुर्म में फिलहाल दोषी नहीं ठहराया है, शायद इसीलिए विधान सभा की सदस्यता बरकरार है। उधर, अपने 24 वर्ष के विधायकी के कार्यकाल में पिछले करीब 13 वर्षों से जेल में ही दिन गुजार रहे हैं। विधानसभा से ज्यादा उनका समय जेल के बैरकों में बीत रहा है। मुख्तार पर 52 मुकदमे बताए गए हैं। पुलिस के मुताबिक, इनमें 15 की तफ्तीश चल रही है।

गौरतलब है कि मुख्तार अंसारी मूलरूप से गाजीपुर जिला का रहने वाला है। उसका पैतृक गांव गाजीपुर का यूसुफपुर मोहम्मदाबाद है, लेकिन चुनाव मऊ से जीतता आया है। जेल में दूसरी बार आमद का आगाज मुख्तार अंसारी ने सुबह नमाज के साथ किया। वह जिस वक्त तड़के 4.30 बजे जेल पहुंचा, तब सुबह अदा की जाने वाली फजिर की नमाज का वक्त था। बैरक में मुख्तार ने पानी लेकर वजू (हाथ-पैर धोए) किया और वहीं नमाज अदा की। इसके फौरन बाद वह सो गया। दोपहर करीब 12 बजे जागा, तो नित्यक्रिया आदि से फारिग होकर अपना पसंदीदा नाश्ता छेना और मट्ठा लिया।

करीब डेढ़ बजे जोहर की नमाज अदा की। दोपहर को जेल प्रशासन द्वारा भेजा गया खाना यह कहकर वापस कर दिया कि अभी इच्छा नहीं है। मुख्तार बैरक के बाहर निकला और दूसरी बैरकों से उन्हें देख रहे अन्य बंदियों का हाथ हिलाकर अभिवादन किया। अखबार मंगाए और बैरक के अंदर ले गया, साथ ही कुछ दवाएं भी खाईं। उधर, बताया जा रहा कि चूंकि मुख्तार विधायक हैं इसलिए उसे जेल में कोई जरूरत होगी तो डीएम को पत्र देना होगा। जेल मैन्युअल के अनुसार व्यवस्था होगी।

लगातार साढ़े 14 घंटे रात के अंधेरे में हाईवे और अन्य सड़कों पर तेज रफ्तार से वाहनों को दौड़ाने में चालकों ने जमकर पसीना बहाया। सबसे ज्यादा संवेदनशीलता मुख्तार की एंबुलेंस को लेकर थी। रोपड़ जेल से रवाना होते समय एंबुलेंस की स्टियरिंग बांदा के चालक रविशंकर के हाथ में थी, लेकिन थकान आदि के मद्देनजर जेवर पहुंचने पर उसकी ड्यूटी बदल दी गई। एंबुलेंस की स्टियरिंग पुलिस के चालक कांस्टेबल ने संभाल ली। वही बांदा तक लेकर आया। एंबुलेंस में मुख्तार के साथ डाक्टर सहित फार्मासिस्ट व वार्ड ब्वाय भी थे। बताया गया कि पंजाब से चलते समय काफिले को 88 पैकेट डिनर और 200 एमएल पानी की 238 बोतलें दी गईं। मुख्तार ने यह खाना नहीं खाया। जेवर के पास पेट्रोल पंप में एंबुलेंस सहित सभी वाहनों में ईंधन भराया गया। जेवर की स्थानीय पुलिस ने भी काफिले में चल रहे सुरक्षा कर्मियों आदि को डिनर पैकेट दिए।

बांदा जेल में मुख्तार अंसारी की बैरक में ड्यूटी करने वाले सुरक्षा कर्मी बॉडी वार्न कैमरे से लैस किए गए हैं। सूत्रों के मुताबिक, कारागार प्रशासन ने पांच बॉडी वार्न कैमरों की व्यवस्था की है। इन कैमरों से मुख्तार के पास जाने वाले हर जेलकर्मी की उससे हुई बातचीत और व्यवहार आदि की रिकार्डिंग हो सकेगी। लखनऊ से एक ड्रोन कैमरा भी मंगाया गया है। यह जेल के ऊपर उड़ान भरकर तस्वीरें ले रहा है। बैरक से लेकर पूरे जेल और बाहर तक सीसी कैमरे लगे हैं। यह कैमरे लखनऊ जेल मुख्यालय से कनेक्ट किए गए हैं। यानी लखनऊ में बैठे जेल और गृह विभाग के अधिकारी भी यहां की गतिविधियां देख सकेंगे।

( शरद मिश्रा- संपादक )
( सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश )




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