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सुनील पटेल की डूबती सियासत: बन गये तमाशा, समर्थक डीडीसी सदस्यों ने इस्तीफ़ा से 'मुंह मोड़ा'
उत्तर प्रदेश

सुनील पटेल की डूबती सियासत: बन गये तमाशा, समर्थक डीडीसी सदस्यों ने इस्तीफ़ा से ‘मुंह मोड़ा’

विनोद कुमार मिश्रा ( सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश )

  • विनोद मिश्रा

बांदा। जिला पंचायत अध्यक्ष सुनील पटेल के राजनीतिक दिन अब “दुर्दिनों” में तब्दील हो गए हैं। 6 करोड़ 21 लाख रुपये के भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे सुनील पटेल अब अपनों के ही भरोसे से हाथ धोते नजर आ रहे हैं ! पहले जिन डीडीसी सदस्यों ने उनके बचाव में कंधे से कंधा मिलाकर साथ देने की घोषणा की थी, वही अब “पलटी मार चुके” हैं। दरअसल, महोबा के डीएम की जांच में सुनील पटेल को 6 करोड़ 21 लाख की वित्तीय अनियमितताओं का दोषी पाया गया था। दबाव में आकर उन्होंने अपने समर्थन में डीडीसी सदस्यों को मीडिया के सामने उतारा, जिन्होंने घोषणा की थी कि यदि उनकी नहीं सुनी गई तो वे “एक सप्ताह के भीतर सामूहिक इस्तीफा” देंगे।

सुनील पटेल की डूबती सियासत: बन गये तमाशा, समर्थक डीडीसी सदस्यों ने इस्तीफ़ा से 'मुंह मोड़ा'

समय सीमा खत्म हो चुकी है लेकिन “कोई भी सदस्य अब इस्तीफा देने को तैयार नहीं”। वजह साफ है “डूबते जहाज में कोई सवार नहीं होना चाहता” ! बताते हैं कि इस मुद्दे पर बुधवार को जिला पंचायत के डाक बंगले में एक अहम बैठक बुलाई गई, जिसमें सुनील पटेल ने सदस्यों से इस्तीफा देने की अपील की ? लेकिन सदस्यों ने एक नई शर्त थमा दी “पहले आप इस्तीफा दें, फिर हम भी देंगे।” सुनील पटेल के लिए ये शर्त किसी “आसमानी बिजली से कम नहीं” थी ! उन्होंने इस्तीफा देने से इनकार कर दिया और समर्थकों ने भी उनसे किनारा कर लिया। कुछ सदस्यों ने तो यह तक कह दिया कि “अब आप अपने रास्ते, हम अपने रास्ते”। राजनीतिक संकट केवल भ्रष्टाचार तक सीमित नहीं है। बबेरू में “निर्दोष राजेंद्र पांडे के घर पर बुलडोजर चलवाने का मामला भी अब सुनील पटेल की गर्दन फंसाने” लगा है।

सुनील पटेल का 'जाती' दांव' पड़ा उल्टा: संगठन के सवालों में 'फंसे' अध्यक्ष !

आरोप है कि सुनील पटेल ने अपने राजनीतिक रसूख का दुरुपयोग कर प्रशासन से बुलडोजर चलवाया ! यही नहीं, बीते बुधवार को जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह जब बांदा व चित्रकूट दौरे पर आए, तब सुनील पटेल ने उनसे “मेरी सुन ले दीन दयाल” की करुण पुकार लगाई, लेकिन सूत्रों के मुताबिक कोई तवज्जो नहीं दी गई ! भ्रष्टाचार, बुलडोजर की राजनीति और हठधर्मी रवैये ने “सुनील पटेल को अकेलेपन के दलदल में धकेल” दिया है। न पार्टी में समर्थन बचा, न डीडीसी सदस्यों का साथ। अब प्रश्न यह है कि क्या सुनील पटेल सम्मानजनक विदाई लेंगे या राजनीतिक अपमान के अंतहीन गलियारे में भटकते रहेंगे ? प्रश्न बड़ा है और जवाब पूरा जिला ढूंढ रहा है ?

 

 

 

Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh

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