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बांदा की प्यासी धरती और किसान की भीगी आंखें: कारी बदरिया से टकटकी लगाए अंखियाँ ?
उत्तर प्रदेश

बांदा की प्यासी धरती और किसान की भीगी आंखें: कारी बदरिया से टकटकी लगाए अंखियाँ ?

विनोद कुमार मिश्रा ( सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश )

  • विनोद मिश्रा

बांदा। “आजा-आजा ए कारी बदरिया” किसानों की यह करुण पुकार अब सिर्फ गीत नहीं, बल्कि बाँदा की सूखती ज़मीन की गूंज बन चुकी है। बारिश के मौसम के बीच जिले में आसमान अब तक बेरहम बना हुआ है। झमाझम बारिस न होने से धरती की प्यास नहीं बुझ रही। खेत पर्याप्त गीले नहीं हो रहे। उम्मीदें चटक रही हैं और किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए खड़ा हैहाथ जोड़े भीगी आँखें लिये खड़ा है।

बांदा की प्यासी धरती और किसान की भीगी आंखें: कारी बदरिया से टकटकी लगाए अंखियाँ ?

जिले की ग्रामीण आबादी, जिनका जीवन खेती पर टिका है, मानसून की बेरुखी से बेहाल है। खेतों की जुताई हो चुकी है, लेकिन धान की बेड़ (नर्सरी) डालने के लिए पर्याप्त पानी की दरकार है। ज्वार और बाजरा जैसी मोटी फसलों की बुआई भी टाल दी गई है क्योंकि धरती की छाती अब भी प्यास से तप रही है। सरकारी आंकड़ों और मौसम विभाग की भविष्यवाणियों के अनुसार मानसून बाँदा पहुंच चुका है, लेकिन बारिश अब तक हल्की वर्षा करके चले जा रहे हैं। जिन किसानों के पास सिंचाई के संसाधन नहीं हैं, वो पूरी तरह आसमानी मेहरबानी के मोहताज हैं। 60 फीसदी से अधिक किसान ऐसे हैं जिनके खेतों में पानी पहुंचाने का एकमात्र ज़रिया बारिश है।

बांदा की प्यासी धरती और किसान की भीगी आंखें: कारी बदरिया से टकटकी लगाए अंखियाँ ?

जिन किसानों ने उधारी में बीज, खाद और ट्रैक्टर का खर्चा उठाया है, वे अब बेमौसम सूखे की चक्की में पिसने को मजबूर हैं। ग्राम कुरसेजा, मवई, बड़ोखर और महुआ जैसे इलाकों में किसानों से बात करने पर गुस्सा,बेबसी और लाचारी तीनों एक साथ दिखती हैं। किसान रामशरण निषाद कहते हैं,“पिछली बार भी बारिश देर से हुई थी, तब नुकसान हुआ। इस बार तो शुरू से ही आसमान ने मुँह फेर लिया है। ऊपर से खाद महंगी, डीज़ल महंगा और बिजली रोज़ गुल।” किसान लल्लूराम पटेल कहते हैं, “सिर्फ योग दिवस मनाने से खेत नहीं चलेंगे। हमें धरती की सेहत के लिए पानी चाहिए। बिजली की अनियमित आपूर्ति और सूखी नहरों के कारण वैकल्पिक सिंचाई भी ठप है। कृषि विभाग की मानें तो अगर अगले 10 दिनों में अच्छी वर्षा नहीं हुई, तो धान की नर्सरी का समय निकल जाएगा और पैदावार पर सीधा असर पड़ेगा।

 

 

Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh

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