
- विनोद मिश्रा
बांदा। कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय बांदा में एक ऐसा सनसनीखेज मामला उजागर हुआ है, जिसने समूचे शिक्षा तंत्र की असलियत को नंगा कर दिया है ! यहां सब्जी विज्ञान विभाग के टॉपर छात्र और छात्र परिषद अध्यक्ष कल्याण सिंह को विभागाध्यक्ष द्वारा नियमों की धज्जियां उड़ाकर मानसिक उत्पीड़न और शैक्षणिक जीवन बर्बाद करने का घिनौना खेल खेला गया ! अब यह मामला न सिर्फ राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, बल्कि मानवाधिकार आयोग और जिलाधिकारी कार्यालय तक जा पहुंचा है।

दोषी बताए जा रहे विभागाध्यक्ष प्रो. अजीत सिंह ने यूनिवर्सिटी के “आरआईबी एक्ट और यूजीएस नियमावली-2018 को पूरी तरह रौंदते हुए बिना किसी आधिकारिक स्वीकृति” के “डीआरसी” गठित कर दी। फिर उसी के ज़रिए कल्याण सिंह के वैध रिसर्च ट्रायल को अवैध घोषित कर दिया गया। “ना तो रिसर्च एडवाइजरी कमेटी से जवाब मांगा गया, और ना ही बोर्ड ऑफ स्टडीज और एकेडमिक काउंसिल की मंजूरी ली गई” सीधा “मनमाना फैसला लिया गया, ताकि छात्र को मानसिक रूप से तोड़ा” जा सके।

कल्याण सिंह ने तीन महीने तक कुलसचिव “प्रो. सुरेंद्र कुमार सिंह को लिखित शिकायतें” भेजीं। लेकिन “जवाब देने के बजाय चुप्पी साध ली गई, जैसे पूरा प्रशासन एक छात्र के करियर की कब्र पर चुपचाप मिट्टी डालने पर आमादा” हो।जब छात्र ने यूजीसी अधिनियम 2023 के तहत एसजीआरसी को शिकायत भेजी, तो हास्यास्पद रूप से शिकायत उसी प्रो. अजीत सिंह को अग्रेषित कर दी गई, जो खुद आरोपों के घेरे में हैं ! यह घटना “विश्वविद्यालय में न्याय प्रक्रिया का मजाक नहीं तो और क्या” है ? जब कल्याण सिंह ने जनसूचना अधिकार अधिनियम 2005 के तहत डीईआरसी गठन की वैधता पर सूचना मांगी, तो विभाग की सच्चाई उजागर हो गई। पहले जिस ट्रायल को अवैध बताया गया था, आरटीआई में उसे वैध घोषित कर दिया गया !

यह सबूत है कि विभागीय मंशा और निर्णय दोनों ही संदेह के घेरे में हैं। छात्र की अंतिम गुहार पर अब मामला उत्तर प्रदेश मानवाधिकार आयोग तक पहुंच गया, और “बांदा जिलाधिकारी को पूरे प्रकरण की जांच के आदेश” मिल चुके हैं। साथ ही छात्र ने राज्यपाल और यूजीसी सचिव को भी पत्र भेज कर जांच और न्याय की गुहार लगाई है। “कल्याण सिंह का यह संघर्ष न सिर्फ व्यक्तिगत न्याय”के लिए है, बल्कि “पूरे शैक्षणिक तंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए बिगुल” है।अगर “इस बार आवाज़ दबा दी गई, तो आने वाली पीढ़ियों के टैलेंट को घुटनों के बल बैठा देने वाला सिस्टम और भी बेलगाम” हो जाएगा।
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