- विनोद मिश्रा
बांदा। मोदी सरकार के मंत्री संजीव बालियान द्वारा पश्चिमांचल राज्य की वकालत एवं एनडीए का हिस्सा ओम प्रकाश राजभर द्वारा पूर्वांचल राज्य की मांग करने पर बुंदेलखंड राज्य की सुस्त पड़ी मांग भी बेचैनी से “विस्फोटक तेवर तलाशने” लगी है। “है कोई माई का लाल जो बुंदेलखंड राज्य की अंधकार में ओझल हो रही मांग को प्रकाश” दिखाये।

दरअसल “बुंदेलखंड में साहसी नेता विलुप्ति प्रजाति” से हो गये है ? इस लिये “बुंदेलखंड की मांग वर्तमान में कुंद” हो गई है। अलग बुंदेलखंड की मांग जब परवान पर थी तो यूपी के झांसी, बांदा, ललितपुर, हमीरपुर, जालौन, महोबा और चित्रकूट जिलों के अलावा मध्य प्रदेश के दतिया, सागर, छतरपुर, टीकमगढ़, दमोह और पन्ना को शामिल कर नया राज्य बनाये जाने पर जोर दिया गया था।

वैसे अलग बुंदेलखंड की मांग भी काफी पुरानी है। 1970 में बुंदेलखंड एकीकरण समिति का गठन हुआ।बुंदेलखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक शंकरलाल ने अलग राज्य की मांग को लेकर आंदोलन भी किया। भाजपा सांसद उमा भारती ने भी 2014 में चुनावी रैली में अलग बुंदेलखंड बनाने का वादा किया था। उन्होंने कहा था केंद्र में भाजपा सरकार बनते ही तीन साल में बुंदेलखंड अलग राज्य बन जाएगा। हालांकि, भाजपा सरकार बनने के बाद भी कुछ हुआ नहीं। सब कुछ “ठन -ठन गोपाल” हो गया।

हालांकि अभी भी अलग राज्य की मांग को लेकर स्थानीय संगठन धरना प्रदर्शन करते रहते हैं। बुंदेलखंड के समाज सेवी एवं वरिष्ठ पत्रकार अनिल शर्मा जो पृथक राज्य की मांग को लेकर एकजुटता का प्रयास कर रहें हैं उनका कहना है की बुंदेलखंड पिछड़ा हुआ है और अलग राज्य बनने से यहां का विकास होगा।
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