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जलशक्ति मंत्री रामकेश नें शासन से बैठाई जांच : पीने का पानी नहरों में छोड़नें से फंसे अफसर
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जलशक्ति मंत्री रामकेश नें शासन से बैठाई जांच : पीने का पानी नहरों में छोड़नें से फंसे अफसर

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  • विनोद मिश्रा

बांदा। खरीफ सीजन में नहरों को पानी देकर सिंचाई अफसर फंस गए हैं। जल शक्ति राज्य मंत्री रामकेश निषाद नें यह मामला संज्ञान में आने पर शासन से जांच बैठा दी है। इसके चलते सिंचाई महकमें “अफरा -तफरी” मची है। जलशक्ति राज्य मंत्री नें बताया की मामला झांसी जिले का है।

जलशक्ति मंत्री रामकेश नें शासन से बैठाई जांच : पीने का पानी नहरों में छोड़नें से फंसे अफसर
Jal Shakti Minister Ramkesh asked the government to investigate: Officers trapped due to release of drinking water in canals

संज्ञान में आया की पिछले करीब एक माह के दौरान राजघाट एवं माताटीला बांध का जल स्तर तयशुदा निशान से नीचे था लेकिन, इसके बावजूद सिंचाई अफसरों ने नहरें खोल दीं। जबकि नियमों के मुताबिक इन परिस्थितियों में नहर को पानी देने पर रोक रहती है। जलाशय की ऑडिट रिपोर्ट में अफसरों की यह लापरवाही उजागर हुई है। शासन स्तर से स्थानीय अफसरों से जवाब तलब किया गया है। शासन से पत्र जारी होने के बाद अधीक्षण अभियंता से लेकर अधिशासी अभियंता के बीच खलबली मची है।

जलशक्ति मंत्री रामकेश नें शासन से बैठाई जांच : पीने का पानी नहरों में छोड़नें से फंसे अफसर
Jal Shakti Minister Ramkesh asked the government to investigate: Officers trapped due to release of drinking water in canals

दरअसल, जलाशयों का एक हिस्सा पीने के पानी के लिए हमेशा सुरक्षित रखना होता है। इससे बचे पानी को ही सिंचाई के लिए छोड़ा जाता है। जलाशयों में हर माह का जल स्तर तय रहता है। राजघाट एवं माताटीला बांध में 7 अगस्त से 21 अगस्त के दौरान 1007-1011 फुट तक पानी रहना चाहिए था लेकिन, बांध में इतना पानी नहीं था।

जलशक्ति मंत्री रामकेश नें शासन से बैठाई जांच : पीने का पानी नहरों में छोड़नें से फंसे अफसर
Jal Shakti Minister Ramkesh asked the government to investigate: Officers trapped due to release of drinking water in canals

इस दौरान औसतन बांध में एक फुट पानी कम था। न्यूनतम जल स्तर न होने के बावजूद सिंचाई अफसर दतिया कैनाल एवं बेतवा नहर को करीब 20 दिन तक पानी देते रहे। हर तीसरे सप्ताह होने वाले पानी के ऑडिट में अफसरों की यह लापरवाही पकड़ में आ गई। बांध में पर्याप्त पानी न होने के बाद भी सिंचाई के लिए पानी देने को लेकर अफसर फंस गए हैं। शासन ने इसे गंभीर अनियमितता मानते हुए जवाब-तलब कर लिया है।

 

 

 

Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh

 
 



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