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पाकिस्तान और बांदा का सालाना भरत मिलाप पर सवाल: तिंदवारी के ही क्यों पकड़े जाते हैं शिकारी
उत्तर प्रदेश

पाकिस्तान और बांदा का सालाना भरत मिलाप पर सवाल: तिंदवारी के ही क्यों पकड़े जाते हैं शिकारी

  • विनोद मिश्रा

बांदा। जिले के तिंदवारी क्षेत्र के जसईपुर का रफीक पिछले दिन पाकिस्तान की जेल से छूटकर अपने गांव आया है। रफीक को देखकर उसकी मां की आंखों से आंसू छलक पडे ! भाइयों ने गले लगा लिया ! पूरा गांव उमड पडा उसे देखने के लिये ! बहने अपने भाई का स्वागत करने को दौड पडीं ! रिश्तेदार उसकी एक झलक पाने को आतुर हो उठे ! पूरे गांव मे खुशियां छा गयीं ! बूढे, बच्चे, जवान, सब खुशी से झूम उठे ! इस दृश्य पर अहम् सवाल भी बुद्धिजीवी तार्किक ढंग से उठाते हैं। निशाना साधते हैं की रफीक कोई ऐसा राजा-महाराजा है जो पाकिस्तान से कोई जंग जीतकर आया है ?

पाकिस्तान और बांदा का सालाना भरत मिलाप पर सवाल: तिंदवारी के ही क्यों पकड़े जाते हैं शिकारी
Pakistan and Banda’s question on the annual Bharat meet: Why are hunters caught from Tindwari only?

वैसे बता दें की गनीमत है कि इस साल अकेला रफीक पाकिस्तान की जेल से छूटकर आया है। इसके पहले पाकिस्तान की जेलों से छूटकर जसईपुर आने वाले मछली आखेटकों की संख्या हर साल 8 से 18 तक हुआ करती थी। हर बार एक जैसी कहानी ! यह कि – समन्दर मे मछली का शिकार करते-करते पाकिस्तान की सीमा मे प्रवेश कर गये। पाक सैनिकों ने पकड लिया। नाव जब्त कर ली। जेल मे ठूंस दिया । एक साल, या दो साल बाद छोडा है। 80 के दशक से हर साल जसईपुर के मछली आखेटकों के पाकिस्तान मे पकडे जाने की खबरे सुर्खियां बनी। पकडनें -छूटने का दस्तूर सा बन गया।


पकडे जाने पर गांव और परिवार मे लोग शोक मनाये नहीं मालूम ! लेकिन अचानक खबर पर कि पाकिस्तान की जेलों मे कैद मछली का शिकार करने गये जसईपुर के 23 लोगों को पाकिस्तान की जेलों से रिहा कर दिया गया है। दो दिन बाद सब गांव आ जायेंगे। बस फिर क्या ! खबरों में सुर्खियां बन जाती की गांव मे दीवाली जैसा माहौल। मानो-रामजी लंका फतह करके अयोध्या लौट रहे हों ? साल- दर साल निरंतर यही क्रम चलता है। हर साल पकडे जाते और छोडे जाते रहे। सिर्फ जसईपुर के लोग !

पाकिस्तान और बांदा का सालाना भरत मिलाप पर सवाल: तिंदवारी के ही क्यों पकड़े जाते हैं शिकारी
Pakistan and Banda’s question on the annual Bharat meet: Why are hunters caught from Tindwari only?

हर साल इनकी पत्नियां अपने सुहाग के लौटने की खुशी मे उत्सव मनाती हैं। माताओं की आंखे खुशी से भर आती रहीं। लेकिन किसी मां ,पत्नी, और भाई ने इन्हे नहीं रोका कि पाकिस्तान की सीमा मे मछली पकडने क्यों जाते हो ? छूट आये हो तो अब न जाना। पर जसईपुर मे हर साल यह भरत मिलाप होता है।पाक जेलों से अपने भाइयों के रिहा होने की खुशी मे परिवार – गांव वाले खुशी से झूम उठते हैं। बकौल रफीक जसईपुर के 3 और पडोसी गांव भुजरख के 3 लोग उसके साथ पकडे गये थे। वह अब भी पाकिस्तान की जेल मे बंद हैं। खानापूरी करने के बाद उन्हे भी रिहा करने की प्रक्रिया को अंतिम रुप दिया जा रहा है।

 

 

 

Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh

 
 



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