- विनोद मिश्रा
बांदा। आयुष आपके द्वार नहीं पहुंच सकी सरकार। योजना के लिये भूमि का चयन वर्षों से लंबित है। चित्रकूटधाम मंडल के सभी जिलों में 50 बेड के आयुर्वेदिक चिकित्सालयों हेतु “भूमि चयन का कार्य ठंड़े बस्ते में पड़ा धूल फांक रहा” है। वर्ष 2018 में बाँदा के जिलाधिकारी ने भूमि चयन के लिए जो पत्रावली शुरू की थी, वह अब विलुप्त सी हो गयी है।

प्रधानमंत्री की इस महत्वकांक्षी योजना में प्रदेश के हर जिले में एक 50 बेड का आयुर्वेदिक अस्पताल तैयार होना है। इसमें तमाम आधुनिकतम मशीनें, योग्य चिकित्सक और महंगी दवाएं भी निशुल्क उपलब्ध होंगी। सरकार की मंशा यह है कि आयुर्वेद पद्धति के उपचार को सरकारी माध्यम से निशुल्क रूप से जन-जन तक पहुँचाया जाए।

इसी उद्देश्य को लेकर यह योजना पूरे मंडल के चारों जिलों में लागू की गई, लेकिन हैरानी की बात यह है कि चित्रकूट धाम मंडल मंडलीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी को इस योजना के बारे में विधिवत ज्ञान ही नहीं है ? इस योजना के अंतर्गत क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी को भूमि का चयन कर के जिला प्रशासन के माध्यम से सरकार को भेजना है, लेकिन अभी तक मंडल के किसी भी जनपद में भूमि का चयन तक नहीं हुआ।

गहराई तक जाने पर जानकारी यह मिली कि इस योजना में धन एवं बजट से खेल खिलवाड़ करने का कोई मौका ही नहीं है, क्योंकि जिला स्तर पर भूमि का चयन करने के बाद जिले स्तर पर अधिकारियों को खर्च करने के लिए कोई धन या बजट नहीं मिल रहा है, बल्कि योजना में भवन निर्माण का काम भारत सरकार की किसी संस्था द्वारा किया जाना है और उसके बाद अस्पताल में चिकित्सकों एवं अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति तथा मशीनों दवाओं एवं फर्नीचर आदि की खरीद प्रदेश सरकार की चयनित संस्था करेगी।

इसी क्रम में बाँदा नगर के गूलरनाका मोहल्ले में वर्तमान में किराए के भवन में चल रहे चार बेड के आयुर्वेदिक अस्पताल को उच्चीकृत करने की योजना है। यह आयुष अस्पताल के नाम से जाना जाएगा, जिसमें आयुर्वेद, होम्योपैथ यूनानी तथा सिद्धा पद्धति के चिकित्सक होंगे। यह अस्पताल अपने निजी भवन में होगा, जिसमें हर्बल पौधे लगाए जाएंगे और जड़ी बूटियों का उत्पादन भी होगा। इस आयुष अस्पताल के लिए भी जिला स्तर पर अधिकारियों को केवल भूमि का चयन करना है और शेष काम प्रदेश सरकार और भारत सरकार करेगी। लेकिन यह योजना भी हवा हवाई झूल रही है।

इस योजना का नारा है “आयुष आपके द्वार”। योजना के अंतर्गत गाँव गाँव और घर घर परीक्षण होंगे और लोगों को एक ही छत के नीचे आयुर्वेद, होम्योपैथ, यूनानी तथा सिद्धा पद्धति एवं प्राकृतिक चिकित्सा तथा योग पद्धति की जानकारी भी दी जाएगी। यह “हेल्थ वैलनेस सेंटर” के नाम से जाना जाएगा। लेकिन विडंबना यह है कि वर्षों बीत जाने के बाद भी यह महत्वकांक्षी योजनाएं केवल आकाश में विचरण कर रही हैं, धरातल पर उनका कोई अस्तित्व नहीं है। जिम्मेदार अधिकारियों को कोई दिलचस्पी भी नहीं है, क्योंकि “जब धन नहीं, तो मन नहीं”। वरिष्ठ पत्रकार एवं शिक्षाविद गोपाल गोयल नें मुख्य मंत्री योगी को पत्र लिख सारी स्थितियों से अवगत भी कराया है।
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