- विनोद मिश्रा
बांदा। कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय में 03 से 05 नवम्बर, 2022 को आयोजित हो रहे 3 दिवसीय किसान मेला में बकरी पालन व्यवसाय पर एक दिन की कार्यशाला रखी गयी है। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो0 (डा0) नरेन्द्र प्रताप सिंह ने बताया कि इस कार्यशाला का आयोजन बकरी शोध पर कार्य कर रही विश्व की सबसे बड़ी संस्था केन्द्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान, मकदूम, मथुरा व कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में किया जायेगा। बकरी पालन व्यवसाय पर विस्तृत जानकारी संस्थान के वैज्ञानिकों द्वारा दी जायेगी।
आगामी किसान मेले में प्रत्येक दिन बुन्देलखण्ड की परिस्थितियों के हिसाब से समसामयिक विषयों पर चर्चा का आयोजन विस्तार पूर्वक किया जायेगा। किसान मेले का मुख्य उद्देश्य नवीन कृषि तकनीकियो हस्तान्तरण, बुन्देलखण्ड की कृषि की दशा एवं दिशा को नया आयाम देना साथ ही कृषि को रोजगारोनमुखी बनाने पर बल दिया जाना है। किसान मेला के दौरान बुन्देलखण्ड में बकरी पालन व्यवसाय को सुगम एवं लाभप्रद बनाने हेतु बकरी पालन सम्बन्धित समस्त आयामों पर वैज्ञानिक व कृषक वार्ता मुख्य आकर्षण होगा।

कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, बाँदा के निदेशक प्रसार, डा0 एन0के0 बाजपेयी ने बताया कि बुन्देलखण्ड में बकरी पालन को व्यवसाय के रूप में अपनाने की अपार सम्भावनायें हैं। डा0 बाजपेयी बताया कि भारतवर्ष में पशुपालन के बीसवें सर्वेक्षण के अनुसार पशुपालन के कुल जनसंख्या का लगभग 27.80: (535.78 मि0) बकरियों की जनसंख्या है, जिसमें कुल 148.88 मि0 देशी बकरियाँ हैं। इन देशी बकरियों में केवल 26.97ः शुद्ध प्रजाति, 61.26ः गैर वर्णातमक तथा 11.77ः उच्च वर्णातमक प्रजातियाँ है। विश्व में भारतवर्ष बकरियों के जनसंख्या में दूसरे नम्बर पर आता है। उत्तर प्रदेश में कुल पशुपालन की जनसंख्या में 21.35ः बकरियों की जनसंख्या है। उत्तर प्रदेश का बुन्देलखण्ड परिक्षेत्र सर्वाधिक (11.91ः) बकरियाँ पाये जाने वाला क्षेत्र है।

पशुपालन के बीसवें जनगणना के अनुसार बुन्देलखण्ड परिक्षेत्र में जालौन जिले में सर्वाधिक बकरियाँ 3,22,607 , हमीरपुर में 2,99,330 तथा बाँदा में 2,81,392 पायी जाती हैं। बकरी पालन के क्षेत्र में सीमान्त एवं लघु कृषक के साथ-साथ युवाओं का भी ध्यान आकर्षित किया है। विगत कुछ वर्षों में वैज्ञानिक विधि से बकरी पालन व्यवसाय अपनाने से अतिरिक्त धन के साथ-साथ रोजगार के नये साधन के रूप में भी विकसित हुआ है। चित्रकूट, महोबा, ललितपुर एवं झाँसी में बकरी पालन की अपार सम्भावनायें हैं। वर्तमान में बकरी पालन को मीट व दूध के लिये पाला जा रहा है।
कुल मीट उत्पादन में बकरी के मीट का प्रतिशत केवल 13.53 ही है जोकि तीसरे स्थान पर है। बकरी पालन व्यवसाय में आने वाली प्रमुख समस्यायें जिसमें वैज्ञानिक प्रबन्धन का आभाव, प्रजाति का चुनाव, आहार एवं चारे का कूप्रबन्धन, बकरी के दूध की सामाजिक स्वीकार्यता तथा बकरी पालन सम्बन्धित दुष्प्रचार एवं सामाजिक मान्यता प्रमुख हैं। इसे वैज्ञानिक जानकारी एवं वैज्ञानिकता के आधार पर दूर किया जा सकता है। इन्ही समस्त आयामों पर वैज्ञानिकों के द्वारा खुले मन्च से समाधान के साथ-साथ बकरी पालन व्यवसाय के विभिन्न आयामों पर विस्तार से चर्चा की जायेगी।
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