- विनोद मिश्रा
बांदा। किचन उदास है और उसकी मालकिन की आंखों में आंसू की बूंदें हिलोरें सी ले रहीं हैं। कैसे सुधरे किचन का बजट? यह सोच माथे पर चिंता की लकीरें गहरी है। त्योहारी सीजन ने आसमान छू रहे सब्जियों के दाम ने घर के किचन का बजट बिगाड़ दिया है।

आलम यह है कि प्याज के साथ ही आलू और टमाटर ही कुछ सहारा हैं. हरी सब्जियों के दाम जेब खाली कर रहा है. प्याज और आलू बाजारों सवा सौ रुपये प्रति पसेरी है।अच्छे टमाटर के दाम भी 60 के पार है। ऐसे में सबसे ज्यादा दिक्कत गृहणियों को हो रही है जिन्हें किचन का बजट संभालना होता है।महंगाई से आम आदमी का पूरा बजट बिगड़ गया है। त्योहार के इस सीजन में लोग घरों में मेहमान के आने से भी डरने लगे है। लोग अब सब्जियों में भी विकल्प को तलाश कर रहे हैं।

मुख्यालय की मंडियों में हर रोज खाई जा सकने वाली हरी सब्जियों के दामों में एक बड़ी बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। जिसके चलते आम आदमी के सामने एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है. जो आलू कभी 10 रुपए किलो बिकता था अब वह दुगने चुका है. टमाटर 35 रुपए किलो बिक रहा है ।हरी सब्जियों की बात करें तो बैगन 50 रुपए, परवल 80 रुपए, , भिंडी 65 रुपए गोभी सौ रुपये प्रति पीस, लहसुन 70 रुपए, तोरई 50 रुपए, शिमला मिर्च 120 रुपए, पालक 80 रुपए, करेला 80 रुपए, और अरबी 50 रुपए,कद्दू और लौकी 40से 50 रुपये किलो बिक रही है। हरी धनियां दो सौ रुपये किलो है।

सब्जी दुकानदारों की मानें तो सप्लाई कम होने से सब्जियों के दाम बढ़ रहे हैं। सप्लाई और डिमांड में गैप होने से ग्राहकों को दिक्कत हो रही है. उधर सब्जी खरीदारों का मानना है कि उनकी थाली से हरी सब्जी गायब हो रही है।जिस तरह से सब्जियों के दाम बढ़ते जा रहे हैं उस तरह से उनकी थालियों में सब्जी कम होती जा रही ।
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