
- विनोद मिश्रा
बांदा। राइफल क्लब मैदान अब सिर्फ खेल का मैदान नहीं रहा, बल्कि यह “सत्ता, विपक्ष और जनभावनाओं” के “टकराव का केंद्र” बन चुका है। भाजपा सदर विधायक प्रकाश द्विवेदी का दावा है कि राइफल क्लब मैदान नीलामी से बचेगा,लेकिन इस “चैलेंजिंग दावे” पर विपक्षी दलों को भरोसा नहीं है। इसी अविश्वास ने इस मुद्दे को सड़क से लेकर सत्ता के गलियारों तक एक बड़े “सियासी संग्राम” में बदल दिया है।

जहां समाजवादी पार्टी के बबेरू विधायक विशंभर सिंह यादव इस मुद्दे पर लगातार मुखर हैं, वहीं अब कांग्रेस ने भी पूरी ताकत के साथ मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस के राष्ट्रीय नेता और पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने राइफल क्लब मैदान की नीलामी रोकने के लिए 17 जनवरी को धरना-प्रदर्शन का ऐलान कर राजनीतिक तापमान और बढ़ा दिया है।

राइफल क्लब का मुद्दा केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं रहा। सपा विधायक विशंभर सिंह यादव के पत्र पर विधानसभा अध्यक्ष पहले ही मामले की जांच के आदेश दे चुके हैं और मुख्यमंत्री से 30 दिनों के भीतर जवाब भी तलब किया जा चुका है। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर नीलामी प्रक्रिया आगे बढ़ती नजर आ रही है, जिससे विपक्ष का संदेह और गहरा गया है!

कांग्रेस ने राइफल क्लब को लेकर जिला से लेकर प्रदेश स्तर तक अपने “तेवर” बुलंद कर दिए हैं। बांदा निवासी और कांग्रेस के राष्ट्रीय नेताओं में शुमार पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने ऐलान किया है कि यदि नीलामी प्रक्रिया नहीं रुकी तो 17 जनवरी को धरना देकर विरोध दर्ज कराया जाएगा। नसीमुद्दीन सिद्दीकी का राइफल क्लब से भावनात्मक जुड़ाव भी है। वे इसी मैदान से निकलकर वॉलीबॉल के बड़े खिलाड़ी बने और राज्य व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान हासिल की। उन्होंने कहा कि यह मैदान किसी दल,व्यक्ति या जाति विशेष का नहीं, बल्कि पूरे शहर की धरोहर है।

दूसरी ओर सदर विधायक प्रकाश द्विवेदी लगातार यह दावा कर रहे हैं कि मुख्यमंत्री ने नीलामी प्रक्रिया रोकने के आदेश दे दिए हैं। उनके अनुसार राइफल क्लब की नीलामी नहीं होगी और इस ऐतिहासिक मैदान को मिनी स्टेडियम के रूप में विकसित किया जाएगा।

हालांकि, प्रशासनिक स्तर पर स्थिति उलझी हुई है। विकास प्राधिकरण ने नीलामी की तिथि 21 जनवरी घोषित कर रखी है और कथित तौर पर आयुक्त व जिलाधिकारी के पास नीलामी रोकने का कोई स्पष्ट निर्देश अब तक नहीं पहुंचा है। अब पूरा शहर “एक सवाल पर ठहर” गया है। क्या राइफल क्लब नीलामी से बचेगा या नहीं? भाजपा का दावा, विपक्ष का अविश्वास, कांग्रेस का धरना और प्रशासनिक असमंजस इन सबके बीच 21 जनवरी को यह तय होगा कि इस सियासी संग्राम का परिणाम “प्लस” होगा या “माइनस”। फिलहाल राइफल क्लब मैदान केवल एक जमीन का टुकड़ा नहीं, बल्कि सत्ता, विपक्ष और जनभावनाओं के टकराव का प्रतीक बन चुका है।
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