– मजदूरों के सामने भुखमरी का संकट !
- विनोद मिश्रा
बांदा ।मनरेगा की मजदूरी के भुगतान में घोर लापरवाही हैं। श्रमिक परेशान हैं। जिम्मदार सुनवाई नहीं कर रहे। मजदूरों के घरों के चूल्हे ठंडे पड़ने की नौबत है।
दरसल ब्लाकों में मनरेगा वेबसाइट में गलत खातों का अंकन किए जाने से 1006 श्रमिकों की मजदूरी महीनों से फंसी है। सीडीओ की कई बार चेतावनी के बावजूद खंड विकास अधिकारियों ने इसे दुरुस्त नहीं कराया। उन्होंने एक सप्ताह में खाते दुरुस्त न किए जाने पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है।
जनपद में सवा दो लाख सक्रिय मनरेगा श्रमिक हैं। मनरेगा वेबसाइट पर 1006 श्रमिकों के गलत खातों का अंकन कर दिया गया है। इसका खामियाजा श्रमिकों को भुगतना पड़ रहा है। खून पसीना बहाने के बाद भी उन्हें मजदूरी नहीं मिल पा रही है। सीडीओ ने पिछले माह ही इन खातों को दुरुस्त कराने के निर्देश सभी बीडीओ को दिए थे। इसके बाद भी की बार नोटिस दी गई, लेकिन कार्य पूरा नहीं हुआ। पर्याप्त समय बीतने के बाद भी इन बैंक खातों को सही नहीं कराया। नरैनी, महुआ व कमासिन में यह संख्या ज्यादा है। प्रदेश में सर्वाधिक त्रुटिपूर्ण खाते बांदा जनपद में प्रदर्शित हो रहे हैं। बड़ोखर ब्लाक में 12, बबेरू में छह, बिसंडा में 50, जसपुरा में 45, कमासिन में 154, महुआ में 109, नरैनी में 552, तिदवारी में 78 श्रमिक कर्मचारियों की मनमानी का शिकार हैं।
सीडीओ हरिश्चंद्र वर्मा ने सभी खंड विकास अधिकारियों को नोटिस दी है। उन्होंने कहा है कि एक सप्ताह में खातों की त्रुटियां दुरुस्त कराएं। अन्यथा बीडीओ के खिलाफ कार्रवाई के लिए मनरेगा आयुक्त को संस्तुति भेज दी जाएगी।

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