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October 12, 2026
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Banda-चांदी के बदले लाल सोना की डकैती!नेता,प्रशासन की डकैतों से दोस्ती!वन विभाग भी हमाम में नंगा !

  • विनोद मिश्रा

बांदा। जिले में “लाल सोना” कुलांचे भर रही है और प्रशासन खामोश! इस लूट में लगें माफियाओं पर सफेदपोसो का भी संरक्षण है। प्रशासन को यह चाँदी के जूते मारते हैं और वह पालतू की तरह जी हजूरी करऩे लगता है।और वह कहता है की चांदी के जूते मारते रहो, लाल सोना लूटते रहो।मशीनें गरजती हैंऔर सफेद पोसो के इशारे पर पुलिस खनन करवाती है। विरोध के स्वर बुलंद होने पर कुछ समय के लिये लाल सोना की डकैती बंद हो जाती हैऔर कुछ दिन बाद बालू की डकैती फिर बहार लेनें लगती है।किसी अधिकारी ने यदि विरोध का दुस्साहस किया तो उसका तबादला उसी तर्ज पर हो जाता है की “बड़े बेआबरू होकर तेरे कूचे से हम निकले” “लाल सोने” की लूटजिले में केन, बागै, रंज और यमुना नदी में मौरंग की करीब आधा सैकड़ा खदानें हैं। इनमें शहर से जुड़ी सोना, गोड़ी बाबा और दुरेड़ी खदान की सबसे ज्यादा बोली लगती है। इसे पाने के लिए ग्वालियर, हैदराबाद, कानपुर, दिल्ली तक के कारोबारी जोर लगाते हैं। खदान आवंटित हो जाने के बाद वह निर्धारित सीमा को छोड़कर करोड़ों रुपये की मौरंग निकालकर जेबें भरते हैं। यहां तक कि यह कहा जाए कि यहां बालू कारोबार से होकर ही राजनीति का बुलंद दरवाजा खुलता है तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। जिसका रुतबा, बालू खनन में उन्हीं लोगों से जुड़े माफिया का बोलबाल होता है। सपा शासन काल में तो यहां बाकायदा सिडीकेट लगाया जाता था। अब भी खनन उसी राह पर है, पर थोड़ा तरीका बदला हुआ है। लाल सोना की लूट में सफेदपोश का परोक्ष व अपरोक्ष रूप से समर्थन होता है। थानाध्यक्षों की संबंधित थानों में तैनाती भी इन्हीं के इशारे पर होती है।एनजीटी के आदेशों की धज्जियांउड़ रहीं हैं।नदियों का सीना चीर रहे मौरंग माफियाओ के खिलाफ एनजीटी में अवैध खनन के खिलाफ याचिकायें दायर हैं। एनजीटी इस पर सुनवाई अभी भी चल ही है। एनजीटी ने चार वर्ष पूर्व सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता आग्नेय सेल को लोकल कमिश्नर तैनात करते हुए यहां अवैध खनन की जांच के लिए भेजा था। उन्होंने दो दिनों तक बागै और केन नदियों में अवैध खनन होते खुद देखा था। अपनी रिपोर्ट एनजीटी बेंच में पेश की थी। 13 लाख घन फीट बालू का अवैध खनन पाया गया था। इस पर शासन को अवैध खनन रोकने के लिए सख्त निर्देश दिए थे, लेकिन इन आदेशों की भी यहां धज्जियां उड़ रही हैं।

वन विभाग की अधिकॄत जमीन में भी अवैध खनन

अतर्रा तहसील  के उतरवां वन क्षैत्र में बागे नदी के कटाव से वन क्षेत्र मेंभारी तादाद में करोड़ों की बालू डंप है। यहां खनन वर्जित है, बावजूद इसके खनन सांठ-गांठ से हो रहा है, जिसमें वन विभाग की भी संलिप्तता बताई जा रही है!इस प्रकार वन विभाग भी लाल सोना की डकैती के हमाम में नंगा है!

दो वर्ष पूर्व हुई थी पिटाई 

जिले में माननीयों की मौरंग कारोबार में हस्तक्षेप की बानगी तत्कालीन खनिज अधिकारी की पिटाई को लेकर देखी जा सकती है। 10 अक्टूबर 2018 को तत्कालीन खनिज अधिकारी की सर्किट हाउस में एक विधायक के गुर्गों ने पिटाई की थी। खनिज अधिकारी ने आरोप लगाया था कि प्रति मौरंग खदान से लाखों रुपये रंगदारी मांगी जा रही थी।

 
 



Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh
 





 

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