– शासन के निर्देश के बाद भी नहीं हो रही नियुक्तियां
-स्वास्थ समिति के माध्यम से नियुक्ति के लिये शासनादेश
– शासन तीन करोड़रुपया नियुक्ति के लिये कर चुका है आवंटित
- विनोद मिश्रा
बांदा। जिले में कोरोना का कहर बदस्तूर जारी है। अब तो उसने मंडल के सबसे बड़े आला अफसर को भी अपनी मंडलायुक्त गौरव दयाल पर भी हमला बोल दिया है।उनकी रिपोर्ट पाजटिव आईं है।

इधर स्वास्थ कर्मचारियों विशेष कर डाक्टरों एंव स्टाफ नर्सों की कमी भी यहां रोगियों की देखभाल में मुसीबत का सबब बनी हुई हैं।स्वास्थ कर्मचारियों की नियुक्ति के लिये बांदा में शासन द्वरा पहली किस्त के रूप में बांदा को तीन करोड़ रुपया भी जारी हुये एक माह से अधिक हो चुका है। जिला स्वास्थ समिति के माध्यम से डाक्टरों, स्टाफ नर्सोतथा अन्य पैरामेडिकल वर्करों की नियुक्ति के निर्देश थें पर पता नहीं क्यों इस विषम परिस्थितियो में नियुक्ति का मामला ठंढे बस्ते में पड़ा है वह आश्चर्य के साथ ही समझ के बाहर है।जनपद में कोरोना के 57 नए मरीज पाए गए। मंडलायुक्त की भी रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। संक्रमितों में 21 महिलाएं और दो बच्चे भी हैं।
मेडिकल कालेज की 7, सीएचसी के 4, रेलवे सीजेएम कोर्ट, इंदिरा नगर, विकास भवन, जवाहर नगर में 1-1, बलखंडी नाका में 2, कालूकुआं व पुरानी तिंदवारी में 3-3, बबेरू में 9, चकचटगन में 2 संक्रमित शामिल हैं। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक 30 संक्रमितों को स्वस्थ हो जाने पर डिस्चार्ज किया गया है। सक्रिय मरीजों की ताजा संख्या 396 बताई गई है।
उधर, कृषि विश्वविद्यालय में चल रहे कोविड सेंटर में चल रही बदहाली की पोल डीएम आनंद कुमार सिंह के सामने मरीजों ने खोल दी। यहां 9 सितंबर से भर्ती मरीज ने बताया कि डाक्टर नियमित चेकअप नहीं करते। सिर्फ दवा दे दी जाती हैं। रोटियों की गुणवत्ता घटिया है। बाथरूम आदि में सफाई की व्यवस्था नहीं है। बेडों पर चादर नहीं बिछाई जाती। डीएम ने इसे गंभीरता से लेते हुए चेतावनी दी कि तत्काल अव्यवस्थाएं दूर नहीं हुईं तो कार्रवाई की जाएगी।

डीएम सुबह 10.25 बजे विश्वविद्यालय के कोविड सेंटर पहुंचे। उन्हें डॉ. सौरभ प्रकाश ने बताया कि यहां कुल 75 बेड हैं। मौजूदा में 45 मरीज भर्ती हैं। तीन शिफ्टों में डाक्टर की ड्यूटी है। दो बड़े हाल और 15 कमरे हैं।मरीजों का खाना बाहर से तैयार होकर आता है। नाश्ते के बाद दोपहर में दाल, चावल, रोटी और रात में पूरा भोजन दिया जाता है। समय-समय पर संक्रमित मरीजों की थर्मल स्क्रीनिंग की जाती है।
डीएम ने निरीक्षण में मौजूद मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एनडी शर्मा और तैनात डॉ. सौरभ को निर्देश दिए कि मरीजों के खाने की गुणवत्ता सुधारें, सफाई व्यवस्था भी दुरुस्त करें। सभी डाक्टर नियमित रूप से मरीजों को देखें। बेड की चादर अनुरूप से बिछाएं। कपड़ों और चादर आदि को सैनिटाइज करायें।

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