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बांदा गोल्ड मैडल हासिल करने की ओर :अन्य जिले फिलहाल पिछलग्गू !
उत्तर प्रदेश

बांदा गोल्ड मैडल हासिल करने की ओर : अन्य जिले फिलहाल पिछलग्गू !

 

  • विनोद मिश्रा

बांदा। बांदा आग का गोला बन गया है। गर्मी नये रिकार्ड की ओर बढ़ती प्रदेश में गोल्ड मैडल हासिल करने को बेताब है। अभी मई -जून का महीना शुरू नहीं हुआ लेकिन इस साल गर्मी मार्च से ही इतराने लगी थीं। जिससे नदी , तालाब व पोखरो में पानी कम होता जा रहा है। जिले में यमुना, केन व बागै प्रमुख नदियां हैं। भीषण गर्मी में नदियां तप रही हैं, जिससे इनका भी जल स्तर कम हुआ है।

बांदा गोल्ड मैडल हासिल करने की ओर :अन्य जिले फिलहाल पिछलग्गू !
Towards achieving Banda Gold Medal: Other districts are currently hanging !

अप्रैल का आधा से ज्यादा महींना बीत गया। गर्मी जोरो पर है। अभी कल ही तापमान 48 डिग्री सेल्सियस तक जा चुका है। तेज गर्मी का असर नदी, तालाब व पोखरो में भी दिखाई दे रहा है। नदियो के किनारे बहुत से क्षेत्रो में लोग सब्जी आदि की फसले गर्मीं में पैदा करते हैं। जिनसे उनका गुजर बसर चलता है। लेकिन नदियो की जलधारा इस समय पतली पड़ गई है। यमुना नदी में चिल्ला व उसके आसपास के इलाकों में लोग सब्जियों के साथ तरबूज, खरबूज, ककड़ी आदि की खेती होती हैं।

बांदा गोल्ड मैडल हासिल करने की ओर :अन्य जिले फिलहाल पिछलग्गू !
Towards achieving Banda Gold Medal: Other districts are currently hanging !

इसी तरह केन में भूरागढ़ से लेकर नरैनी तक कई इलाकों में यह फसले पैदा की जाती हैं। बागै में भी बदौसा सहित आसपास के क्षेत्रों में जायद वाली फसले पैदा की जाती हैं। लेकिन इस साल समय पहले अधिक गर्मी पड़ने के चलते इन नदियो खासकर केन व बागै में जल स्तर कम होने से जल धार पतली पड़ गई है। केंद्रीय जल आयोग के बांदा कार्यालय के मुताबिक यमुना का चिल्ला में जल स्तर 84.19 मीटर व भूरागढ़ में केन का जल स्तर 93.46 मीटर है। दोनो नदियो का जल स्तर एक सेंटीमीटर रोजाना घट रहा है।

बांदा गोल्ड मैडल हासिल करने की ओर :अन्य जिले फिलहाल पिछलग्गू !
Towards achieving Banda Gold Medal: Other districts are currently hanging !

बांदा में कुल तालाबो की कुल संख्या 2290 है। पंचायती राज विभाग के आंकड़ो के मुताबिक 1816 में पानी बताया जा रहा है। जबकि आंकड़ो में 474 तालाब सूख गए हैं। इसी तरह काफी संख्या में पोखर भी जवाब दे गए हैं। खासकर गर्मी के दिनो में यह तालाब व पोखर पशु- पक्षियों के प्यास बुझाने के काम आते हैं। जब इन तालाब व पोखर सूख जाते हैं। तो सबसे ज्यादा दिक्कतइंसान ही नहीं पशु- पक्षियों को भी होती है।

 
 



Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh
 





 

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