- विनोद मिश्रा
बांदा। चित्रकूट मंडल का किसान सरकार के फरमान से अपने को बर्बाद मान माथा कूट रहा है। हाय दईया की सिसकारी सी गांवों में गूंज रही है। किसानी घाटा -घाटा के कोड़े मारने लगी है।

दरअसल डीजल के बाद अब किसानों पर खाद महंगी होने की मार पड़ी है। पहली अप्रैल से डीएपी खाद के दामों में 150 रुपये प्रति बोरी (50 किलो) की वृद्धि कर दी गई है। जायद व खरीफ की फसल के लिए किसानों को बढ़े दामों में ही खाद मिलेगी। चित्रकूटधाम मंडल के चारों जनपदों में किसानों पर अपनी फसल खाद से सरसब्ज करने के लिए 22 करोड़ रुपये और खर्च करने होंगे। मंडल करीब 3 लाख पंजीकृत किसान हैं ,जो डीएपी का इस्तेमाल करते हैं।

यहां किसान सिंचाई संसाधनों के अभाव में खरीफ व रबी यानी दो फसलें लेता है। खरीफ में 1 लाख 98 हजार व रबी में 5 लाख 37 हजार क्विंटल डीएपी की जरूरत पड़ती है। डीजल के दामों में लगातार बेतहाशा वृद्धि के बाद अब खाद की बोरी में एकमुश्त 150 रुपये बढ़ा दिए गए।

इससे मंडल के किसानों पर 22 करोड़ रुपये सालाना का सीधा खर्च बढ़ा है। उनका कहना है कि बीज, सिंचाई, डीजल, खाद आदि में जितना पैसा खर्च हो जाता है उतनी पैदावार नहीं होती। संयुक्त कृषि निदेशक चित्रकूटधाम मंडल उमेश कटियार ने कहा कि किसानों को बढ़े हुए दामों पर नई आने वाली खाद मिलेगी। जो खाद पहले से यहां डंप है वह पुराने दाम पर ही मिलेगी। नई खाद की बोरी में नए दाम प्रिंट होंगे। इन हालातों में किसानी से तौबा करने को किसान मजबूर हो गया है।
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