- विनोद मिश्रा
बांदा। जिले में परिषदीय स्कूल लगता हैं बेलगाम और बेपरवाह हो गये हैं। वह कैसे आप जान लीजिये। शासन ने परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं के बैठने के लिए बेंच-डेस्क की व्यवस्था की है। इसके लिए वर्ष 2019-20 में जनपद को भी करीब 7.20 करोड़ रुपये दिए थे। करीब डेढ़ वर्ष बीत गए विद्यालयों में अभी तक फर्नीचर नहीं पहुंचा। छात्र-छात्राओं को मजबूरन जमीन में बैठकर पढ़ाई करनी पड़ रही है। खरीदे गए फर्नीचर का हिसाब भी निदेशालय को नहीं दिया गया है। अपर परियोजना निदेशक ने नाराजगी जाहिर करते हुए सप्ताह भर की मोहलत दी है।

जनपद में बेसिक शिक्षा विभाग के 1094 प्राथमिक और 631 उच्च प्राथमिक विद्यालयों का संचालन हो रहा है। इनमें करीब सवा दो लाख छात्र-छात्राएं अध्ययन कर रहे हैं। शासन परिषदीय स्कूलों को अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस करने को पानी की तरह पैसा बहा रही है। लेकिन, जिला स्तर के अफसर इसे गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। बच्चों को बेंच और डेस्क पर पढ़ाई करने के लिए शासन ने वर्ष 2019-20 में बेसिक शिक्षा विभाग को प्रति विद्यालय 1.80 लाख रुपये का बजट दिया था। जनपद में 400 विद्यालयों में फर्नीचर उपलब्ध कराया जाना है।

इसके लिए 7.20 करोड़ रुपये बेसिक शिक्षा विभाग में डेढ़ वर्ष से डंप पड़े हैं। इन 400 विद्यालयों के तीन-तीन कक्षों को स्मार्ट बनाने के लिए फर्नीचर से लैस करना है। बेसिक शिक्षा विभाग का दावा है कि करीब 50 प्रतिशत विद्यालयों में फर्नीचर का इंतजाम हो गया है। जबकि अन्य में शीघ्र कराया जा रहा है। जबकि हकीकत यह है कि अधिकांश विद्यालयों में बच्चे आज भी जमीन में टाट-फट्टी बिछाकर बैठते हैं और शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।
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