नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में प्रिवेंशन आफ मनी लांड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के दुरुपयोग के आरोपों को नकारते हुए और कानून की तरफदारी करते हुए कहा कि कानून में कड़े विधायी प्राविधान और सेफगार्ड मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि जब से यह कानून लागू हुआ 2002 से लेकर अबतक प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) 4700 मामलों की जांच की है लेकिन गिरफ्तारियां सिर्फ 313 ही हुईं क्योंकि कानून में कड़े विधाई सेफगार्ड मौजूद हैं। केंद्र सरकार की ओर से पेश सालिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि विजय माल्या, नीरव मोदी और मेहुल चोकसी से 18000 करोड़ की संपत्ति जब्त की गई और बैकों को यह पैसा लौटाया गया। मामले में गुरुवार को भी बहस जारी रहेगी।

– डिफाल्टरों के खिलाफ विदेशों में कानूनी लड़ाई जारी
मालूम हो कि विजय माल्या, नीरव मोदी और मेहुल चोकसी हजारों करोड़ रुपये बैंकों से कर्ज लेकर बिना चुकाए विदेश भाग गये हैं जिन्हें प्रत्यार्पित करके लाने के लिए विदेशी अदालतों में कानूनी लड़ाई लड़ी जा रही है। सुप्रीम कोर्ट में करीब दो सौ याचिकाएं लंबित हैं जिनमें पीएमएलए कानून के प्राविधानों की वैधानिकता को चुनौती दी गई है। याचिकाओं में कानून के विभिन्न प्राविधानों को अस्पष्ट और कानून के तय सिद्दांतों के खिलाफ बताते हुए उनके दुरुपयोग के आरोप लगाये गए हैं। सालिसिटर जनरल तुषार मेहता केंद्र सरकार की ओर से पक्ष रख रहे थे। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति एएम खानविल्कर की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ कर रही है।
– प्रवर्तन निदेशालय द्वारा की गई कार्रवाई का दिया ब्योरा
बुधवार को मेहता ने पीएमएलए कानून आने के बाद ईडी द्वारा की जांचों और गिरफ्तारियों का ब्योरा कोर्ट में पेश किया। उन्होंने कहा कि 2002 में कानून आने के बाद से अभी तक ईडी ने कुल 4700 मामलों की जांच की है लेकिन गिरफ्तारी सिर्फ 313 हुई हैं क्योंकि कानून में कड़े सेफ गार्ड हैं। मेहता ने कहा कि विजय माल्या, नीरव मोदी और मेहुल चोकसी से 18000 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई और यह रकम बैंकों को वापस लौटाई गई। अभी 67000 करोड़ की संपत्ति के मनीलां¨ड्रग के केस सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं। मेहता ने पीएमएलए कानून के तहत पिछले पांच वर्षों में की गई जांचों का ब्योरा देते हुए कोर्ट को बताया कि पुलिस और अन्य इन्फोर्समेंट एजेंसियों द्वारा करीब 33 लाख एफआइआर अधिसूचित अपराधों में दर्ज की गई जबकि पीएमएलए के तहत उनमें से सिर्फ 2186 मामलों की ही जांच की गई।
मेहता 2016-17 से लेकर 2020-21 तक का ब्योरा दे रहे थे। उनका कहना था कि अन्य देशों ब्रिटेन, अमेरिका, चीन, आस्टि्रया, हांगकांग, बल्जियम और रूस की तुलना में भारत में मनी लांड्रिंग के बहुत कम मामलों की जांच हुई है। कानून में पर्याप्त विधायी सावधानियां हैं ताकी कानून का दुरुपयोग न हो सके। ऐसा नहीं है कि कानून बहुत कड़ा और नागरिकों की स्वतंत्रता का हनन करने वाला है। मेहता ने कहा कि भारत वैश्विक स्तर पर एन्टी मनी लांड्रिंग नेटवर्क और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संधियों का हिस्सा है जिसके तहत सदस्य देशों को अपने मनी लां¨ड्रग कानून को अन्य देशों की तरह ही लाना होता है। मनीलां¨ड्रग इतना व्यापक अपराध है कि इससे कोई देश अकेले नहीं निपट सकता इसमें वैश्विक स्तर पर मिलजुल कर चलना पड़ता है।
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