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बांदा सदर विधान सभा : 2017 में कांग्रेस नहीं बचा सकी थी अपना गढ़
उत्तर प्रदेश

बांदा सदर विधान सभा : 2017 में कांग्रेस नहीं बचा सकी थी अपना गढ़

 

  • विनोद मिश्रा

बांदा। जिले की सदर विधान सभा सीट कांग्रेस का गढ़ मानी जाती थी, पर 2017 में यहां कमल खिला। यहां तीन बार के विधायक पूर्व कैबिनेट मंत्री विवेक सिंह को करारी हार का सामना करना पड़ा था। जनपद की यहां सदर सीट को वीआईपी सीट भी माना जाता है।

बांदा सदर विधान सभा : 2017 में कांग्रेस नहीं बचा सकी थी अपना गढ़
Banda Sadar Vidhan Sabha: Congress could not save its stronghold in 2017

इस सीट के राजनीतिक़ इतिहास पर नजर दौड़ायें तो सबसे ज्यादा कांग्रेस का दबदबा रहा है।एक जमाने में बसपा के कद्दावर नेता वर्तमान में कांग्रेसी नसीमुद्दीन सिद्दीकी के कारण भी यह सीट चर्चित रही।

बांदा सदर विधान सभा : 2017 में कांग्रेस नहीं बचा सकी थी अपना गढ़
Banda Sadar Vidhan Sabha: Congress could not save its stronghold in 2017

इस सीट पर 1991 में बसपा के नसीमुद्दीन सिद्दीकी की जीत हुई तो वहीं 1993 में भाजपा प्रत्याशी राजकुमार शिवहरे ने जीत दर्ज की। 1996 में कांग्रेस के विवेक कुमार जीते। 2002 में बसपा के बाबूलाल कुशवाहा ने चुनाव में कांग्रेस के विवेक सिंह को हरा दिया।

बांदा सदर विधान सभा : 2017 में कांग्रेस नहीं बचा सकी थी अपना गढ़
Banda Sadar Vidhan Sabha: Congress could not save its stronghold in 2017

सत्ता ने फिर करवट ली, जिसके बाद 2007 और 2012 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के विवेक सिंह ने बसपा प्रत्याशी को हराकर जीत दर्ज की। जिसके चलते कांग्रेस के लिए यह वीआईपी सीट बन गई। वर्ष 2017 के चुनाव में भाजपा ने यह सीट कांग्रेस से छीन ली। भाजपा प्रत्याशी प्रकाश द्विवेदी यहां से विधायक चुने गए। इस चुनाव में 21 प्रत्याशियों ने अपना भाग्य आजमाया था। भाजपा प्रत्याशी प्रकाश दिवेदी को इस चुनाव में 83 हजार 169 मत मिले जबकि बसपा के मधुसूदन कुशवाहा 50 हजार 341 वोट पर ही सिमट गये।

बांदा सदर विधान सभा : 2017 में कांग्रेस नहीं बचा सकी थी अपना गढ़
Banda Sadar Vidhan Sabha: Congress could not save its stronghold in 2017

2017 में इस सीट पर भाजपा का कमल खिला। भाजपा ने सीट 32 हजार 828 मतों के भारी अंतर से जीत दर्ज की. वहीं तीन बार के विधायक रहे पूर्व मंत्री विवेक सिंह को भी हार का सामना करना पड़ा. वह अपना गढ़ नहीं बचा पाए। इस बार भाजपा से पुनः प्रकाश दिवेदी मैदान में हैं और सपा से विवेक सिंह की पत्नीमंजुला और बसपा से धीरज राजपूत। वैसे मुकाबला भाजपा, सपा और बसपा के बीच संभावी हैं।


( शरद मिश्रा- संपादक )
( सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश )

 
 



Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh
 





 

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