- विनोद मिश्रा
बांदा। अतर्रा तहसील क्षेत्र के ग्राम महुटा की चारागाह (गोचर) की सुरक्षित जमीन अब भू – माफिया के कब्जे से मुक्त होगी। तहसील दिवस में जिलाधिकारी अनुराग पटेल के समक्ष ग्रामीणों ने धरना प्रदर्शन कर समस्या से अवगत कराया। जिलाधिकारी की ओर से टीम बनाकर जमीन खाली कराए जाने की बात कही गई।डीएम की सख्ती के कारण तहसील प्रशासन तत्काल हरकत में आया। राजस्व निरीक्षक के नेतृत्व में लेखपालों की टीम को मौके पर भेज पैमाइश शुरू कराई है।

ग्रामसभा महुटा की 30 बीघे जमीन गोचर के लिए आरक्षित है। जिस पर गांव के ही आठ लोग कई वर्षों से अवैध कब्जा कर खेती किसानी का कार्य करते चले आ रहे हैं। उस जमीन को खाली कराने के लिए ग्रामीणों ने कई बार शासन व प्रशासन से गुहार लगाई, लेकिन कोई कार्यवाही न होने पर बीते पांच दिन पूर्व ग्रामीण सत्यप्रकाश मिश्रा ने आमरण अनशन शुरू कर दिया था। चार दिन बीतने के बाद भी जब कोई भी जिम्मेदार अधिकारी मौके पर समस्या का निदान करने नहीं पहुंचा। तो एक सैकड़ा ग्रामीणों ने शनिवार को समाधान दिवस में आकर जिलाधिकारी से अपनी समस्या बताई।

जिसके बाद जिलाधिकारी द्वारा एसडीएम अतर्रा को समस्या के तत्काल निस्तारण के कड़े निर्देश दिए गए, लेकिन समस्या के तत्काल निस्तारण की मांग को लेकर तहसील परिसर में ही ग्रामीण धरना प्रदर्शन करने लगे। जैसे ही तहसील दिवस खत्म हुआ। उसके बाद ग्रामीण जिलाधिकारी के गाड़ी के सामने बैठकर समस्या के तत्काल निस्तारण की मांग की। इस बीच ग्रामीणों की पुलिस से धक्का-मुक्की भी हुई। डीएम के निर्देश पर लेखपालों की टीम भेजी गई है। जिलाधिकारी के आश्वासन के बाद अब ग्रामीणों में गौचर की जमीन भू माफियाओं के कब्जे से मुक्त होने की आस जगी है।
( शरद मिश्रा- संपादक )
( सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश )
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