- विनोद मिश्रा
बांदा। “बिना बिचारे जो करे सो पाछे पछताय” नरैनी सीएचसी में 45 लाख रुपये की लागत से बनाया गया प्राणवायु प्लांट संबंधित अधिकारियों की अदूरदर्शिता और तकनीकी चूक से चालू नहीं हो पा रहा। मुसीबत हो गई है। अधीक्षक परेशान हैं। कहां से पाये रुपयों का बिल। आक्सीजन प्लांट शो पीस बनकर रह गया हैं। यहां लगाए गए जनरेटर की क्षमता ही कम है।

सीएचसी में 50 बेड का वार्ड है। कोरोना काल में ऑक्सीजन की मची परेशानी के बाद यहां इसका प्लांट लगाया गया है। विधायक राजकरन कबीर द्वारा बेमन विधायक निधि से दिए गए 10 लाख रुपये में जनरेटर खरीदा गया था, लेकिन वह भी पर्याप्त पर्याप्त क्षमता का नहीं है। नतीजतन प्लांट चालू नहीं हो पा रहा।

चिकित्साधीक्षक डॉ. अजय प्रताप विश्वकर्मा का कहना है कि प्लांट के लिए 120 केवी क्षमता का जनरेटर होना चाहिए। हालांकि चलने के बाद इसमें 80 केवी का ही लोड पड़ेगा, जबकि नवनिर्मित प्लांट में लगाया गया जनरेटर मात्र 64.5 केवी का है। यह टेस्टिंग में ही फेल हो गया।बिजली विभाग से 100 केवी का ट्रांसफार्मर लेकर प्लांट की टेस्टिंग की गई है।

उधर, प्लांट निर्माण कराने वाली कार्यदाई संस्था साइन नान कंर्वेशनर एनर्जी कंपनी के इंजीनियर सिवप्पा का कहना है कि जनरेटर की खरीदारी उनसे सलाह लेकर नहीं की गई। प्लांट को 100 केवी क्षमता का जेनरेटर चाहिए।
( शरद मिश्रा- संपादक )
( सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश )



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