- विनोद मिश्रा
बांदा। विजली बिभाग नें उपभोक्ता आयोग की अवमानना की कार्यवाही से बचने के लिए सुलह कर निर्धारित राशि जमा कर छुटकारा पाया।

जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग की तत्कालीन पीठ के अध्यक्ष महेश चंद्र निगम,वरिष्ठ सदस्या आशा सिंह और सदस्य कैलाश प्रसाद त्रिवेदी ने बलराम निवासी मोटियारी तहसील नरैनी के मामले में वर्ष 2001 में अधिशाषी अभियंता विद्युत विभाग बांदा, उप खंड अधिकारी अतर्रा, चेयरमैन विद्युत लखनऊ, तहसीलदार नरैनी के विरुद्ध निर्णय पारित किया था। आदेश दिया गया था की 9.1.1995 के बाद जारी विद्युत बिल निरस्त किए जाते है। फीस लेकर पी डी करे। साथ ही विपक्षी द्वारा उपभोक्ता से जो अधिक रुपया 9085 वसूल लिया गया है वह और 1000 मुकदमा खर्चा 2 माह में अदा करना होगा। अन्यथा 9085 पर 12 प्रतिशत ब्याज देय होगा।

विद्युत विभाग ने इस निर्णय के विरुद्ध राज्य उपभोक्ता आयोग लखनऊ में अपील की। राज्य आयोग की पीठ के सदस्य राम चरण चौधरी, और राज कमल गुप्ता ने विद्युत विभाग की अपील यह कह कर निरस्त कर दी कि जिला उपभोक्ता आयोग का आदेश विधि सम्मत है। इसी आधार पर राज आयोग ने विद्युत विभाग की अपील को निरस्त कर दी।

इसी क्रम में जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष तूफानी प्रसाद और सदस्य अनिल कुमार चतुर्वेदी ने विद्युत विभाग के अधिशासी अभियंता नोटिस जारी किया। कहा कि वह जिला उपभोक्ता आयोग बांदा के तत्कालीन पीठ द्वारा पारित आदेश का अनुपालन करें ।अन्यथा विधि के अनुसार कार्यवाही की जाएगी। इस पर विद्युत विभाग के अधिशासी अभियंता श्री प्रसाद उनके पक्ष में 36906 जमा कर सुलह कर ली। परिवादी बलराम को अधिवक्ता अखिलेश कुमार अग्निहोत्री की शिनाख्त पर चेक दिया गया ।यह जानकारी जिला उपभोक्ता आयोग की रीडर स्वतंत्र रावत द्वारा दी गई।

( शरद मिश्रा- संपादक )
( सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश )



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