- विनोद मिश्रा
बांदा। बुंदेलखंड में लागू की गई नेशनल मिशन ऑन सस्टेनिंग हिमालियन ईको सिस्टम परियोजना से यहां का जलवायु परिवर्तन के अनुकूल बनेगा। साथ ही ग्राम वन समितियों को जागरूक करने के लिए यह परियोजना वरदान है। यह दावा चित्रकूटधाम मंडल के वन संरक्षक एन के सिंह ने किया है।

कृषि विश्व विद्यालय सभागार में उक्त योजना का कार्यशाला भी आयोजित हुआ। मंडल के चारों जिलों सहित जालौन के वन विभागीय अधिकारी और किसान आदि शामिल थे। एनएएफसीसी योजना में वनों की सुरक्षा, निगरानी, दंड और अधिकार आदि के बारे में बताया गया। अधिवक्ता संजय राय और राकेश बहादुर ने वन अपराध और उन पर नियंत्रण के बारे में जानकारियां दीं। लोगों के सवालों के जवाब भी दिए।

डीएफओ संजय अग्रवाल ने बुंदेलखंड की भौगोलिक परिस्थिति का जिक्र करते हुए बताया कि यहां के लिए यह योजना वरदान बनेगी। योजना 4 जिलों बांदा, हमीरपुर, चित्रकूट और उरई में लागू की गई है। डीएफओ संजय मल (महोबा), जेपीएन तिवारी (उरई), यूसी राय (हमीरपुर), एसीएफ ऊषा देवी (चित्रकूट) ने वन्य जीवों का महत्व बताया। नाबार्ड डीडीएम संदीप कुमार गौतम ने बताया कि यह योजना नाबार्ड से वित्त पोषित है।

उप प्रभागीय वनाधिकारी एमपी गौतम ने जलवायु परिवर्तन पर मानव जीवन पर पड़ने वाले प्रभावों की जानकारी दी। कार्यशाला में वन विभाग के अधिकारी कर्मचारी और सढ़ा, करतल, डढ़वा मानपुर, माचा तथा अमारा गांवों के किसान शामिल थे।

( शरद मिश्रा- संपादक )
( सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश )



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