- विनोद मिश्रा
बांदा। जिले में समाजवादी पार्टी बिखराव की ओर है! संगठन का ढांचा चरमरा रहा है! आपसी अंतर्कलह चरमोत्कर्ष पर है! संगठन का ढांचा संभालना वर्तमान जिलाध्यक्ष के बस में नहीं है। यह हम नहीं कह रहे, संगठन का स्वरूप अपने-आप में स्वयं जर्जर अवस्था में रो- रोकर अपनी व्यथा-कथा का इजहार कर रहा है !

दरअसल समाजवादी पार्टी का जिला संगठन नेतृत्व में पदाधिकारी सांप-नाथ नाग नाथ बन गये हैं। संगठन की मजबूती से कुछ नहीं लेना देना! आपसी कलह संगठन को डस रही है ! बड़ा से लेकर छोटा नेता सभी गुटबाजी के शिकार हैं ! विधान सभा चुनाव में टिकट की “टपक रही लार “संगठन को ही कहीं “टपका” दे तो आश्चर्य नहीं माना जायेगा ! संगठन के लोगों से बात करें तो वह इसी ओर इशारा करते हैं !

जिलाध्यक्ष विजयकरण यादव से लेकर पूरी जिला कार्यसमिति में जन जुड़ाव वाले नेताओं का अभाव है!अभी डीडीसी चुनाव के दौरान दो बार विधायक रहे विशंभर यादव और अनिल यादव में ऐसी वर्चस्व की सार्वजिक तौर पर लड़ाई चली जो थाने तक पहुंची। थाने में ही दोनों नेता एक दूसरे को भद्दी-भद्दी गालियों से नवाजते रहे। पार्टी की जिले में बची-खुची शाख भी “मटियामेट” हो गई।

पूर्व विधायक विशंभर यादव का कथित अभिमानी चरित्र भी संगठन को नुकशान पहुंचा रहा है ! पहली बार विधायक बनें तोउनका कार्यकाल अभिमान विहीन रहा, लेकिन दुबारा विधायक बनने एवं पार्टी की सरकार प्रदेश में बन जाने पर उन्हें अहंकार नें घेर लिया ! यहां तक की अपने समर्थकों तक को भूल गये ! ईश्वर का गुस्सा उनपर कहर बनकर टूटा ! अपना दूसरा चुनाव भी बबेरू विधानसभा से हारे और अहंकार चूर हुआ!पर पार्टी जन मानते हैं की रस्सी जल गई पर अभी “ऐंठन” नहीं गई।

सपा का जिले में दुर्भाग्य हैं की राज्य सभा सांसद विशंभर निषाद को विलग रखा जाये तो जमीन और अपने समाज में पकड़ रखने वाले नेताओं का अभाव हैi जो हैं भी उनकी हकीकत सिर्फ हवा-हवाई हैं !

एक समय था जब जाति और जमीनी आधार रखने वाले पूर्व जिला उपाध्यक्ष, कोषाध्यक्ष, प्रवक्ता रहे महेंद्र सिंह गौतम, युवा मोर्चा के पूर्व जिलाध्यक्ष, सपा के पूर्व जिला सचिव एवं राष्ट्रीय कार्यसमिति के सदस्य बृजभूषण सिंह यादव जिले की राजनीति के केन्द्रीय धुरी थे पर अब संगठन में हाशिये पर रख वही कहानी चरितार्थ कर दी गई जिसे कहा जाता है “अपने पैर में कुल्हाड़ी मारना” !
जिला सपा संगठन में पार्टी हाई कमानके बारे में यह चर्चा होनें लगी है की स्थिति वही बन गई है की” अंधा बांटे रेवड़ी चीन्ह-चीन्ह के देय”! इन हालातों में विधानसभा चुनाव में सपा का प्रदर्शन कहीं जीत के हाशिये पर न चला जाये,यह सोच-सोच कर पार्टी के प्रबुद्धजन काफी चिंतित हैं।

( शरद मिश्रा- संपादक )
( सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश )


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