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जिला परिषद कृषि महाविद्यालय : अध्यक्ष सुनील पटेल करें नजरें इनायत …

 

  • विनोद मिश्रा

बांदा। जिला परिषद कृषि महाविद्यालय में शिक्षक एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारी आर्थिक कंगाली के शिकार हो गये हैं। परिवार का भरण पोषण कैसे हो? यह अहम समस्या बन गई हैं। वेतन और मानदेय के भुगतान के लिये वह सभी जिला पंचायत अध्यक्ष सुनील पटेल की ओर करुणा भरी निगाहों से देख रहें हैं की हे “स्वामी” अपनें इस महाविद्यालय की ओर “नजरें इनायत” करें, ताकि “कर्मचारी आर्थिक ज्वाला” से उबर सके !

जिला परिषद कृषि महाविद्यालय : अध्यक्ष सुनील पटेल करें नजरें इनायत
सीमित संसाधनों से कृषि शिक्षा के क्षेत्र में अहम मुकाम हासिल करने वाले जिला परिषद (पंचायत) द्वारा फरवरी 1994 से संचालित इस कृषि महाविद्यालय का शिक्षण के क्षेत्र में अकल्पनीय प्रगति का गौरवपूर्ण इतिहास है, जिसमें प्राचार्य राजेंद्र गुफ्ता और उनके सहकर्मी शैलेंद्रअवस्थी का महत्वपूर्ण योगदान है,जिसे भुलाया नहीं जा सकता।

जिला परिषद कृषि महाविद्यालय : अध्यक्ष सुनील पटेल करें नजरें इनायत
खैर अब मूल खबर की बात करता हूँ। जनवरी माह से जुलाई माह यानी सात माह से महाविद्यालय को वेतन नहीं मिला। कारण भी रहा पिछली जिला पंचायत का कार्यकाल समाप्त होनें पर यह डीएम के नियंत्रण में चली गई। जिला पंचायत का नया बोर्ड गठित होनें के बाद तक की अवधि में वेतन विहीन स्थिति का यह सात माह का लंबा अंतराल बीत गया। शिक्षक एवं शिक्षणेतर कर्मचारी आर्थिक तंगी से बिलबिला उठे हैं।

जिला परिषद कृषि महाविद्यालय : अध्यक्ष सुनील पटेल करें नजरें इनायत
दरअसल जिला पंचायत द्वारा संचालित यह कृषि महाविद्यालय शासन से वित्तपोषित नहीं हैं। छात्रों की फीस ही महाविद्यालय के संचालन का मात्र आर्थिक अवलंबन है। जिला पंचायत अध्यक्ष इसकी प्रबंध समिति के पदेंन अध्यक्ष होते है। इस नाते महाविद्यालय के संचालन में हर स्तर पर उनकी सहमति औऱ अनुमोदन की जरूरत होती है।


महाविद्यालय कर्मचारियों के वेतन भुगतान पत्रावली पर भी उनके अनुमोदन की प्रतिक्षा है। उम्मीद है की जिला पंचायत अध्यक्ष सुनील पटेल अपने “सुशील व्यक्तित्व” का परिचय देते हुये महाविद्यालय के कर्मचारियों के वेतन भुगतान के साथ ही समान पद पर एक ही दिन औऱ एक ही तिथि को नियुक्त शिक्षणेतर कर्मचारियों को समान मानदेय देने की व्यवस्था की दिशा में भी “उदार हृदय” का परिचय देंगे।क्योकि एक ही दिन समान पद पर नियुक्त लिपिक वर्ग के कर्मचारियों में मानदेय में असमानता प्राकृतिक न्याय के विरुद्ध है।


( शरद मिश्रा- संपादक )
( सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश )

 
 



Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh
 





 

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