- ( मंडल ब्यूरो- विनोद मिश्रा )
चित्रकूट। प्रभु श्रीराम की तपोभूमि और भारत रत्न नाना जी देशमुख की कर्मस्थली चित्रकूट नागपुर के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का दूसरा केंद्र बन रहा है। वहां संघ मुख्यालय है तो चित्रकूट धाम का दीनदयाल शोध संस्थान (डीआरआइ) पिछले डेढ़ दशक में संघ की गतिविधियों के दूसरे अहम केंद्र के तौर पर सामने आया है। डीआरआइ में संघ के प्रकल्पों के वर्ष भर आयोजन हो रहे हैं तो भाजपा को अहम मंथन के लिए तपोभूमि रास आ रही है।

– संघ की सियासत का चित्रकूट से गहरा नाता
20 साल पहले तक बुंदेलखंड के चित्रकूटधाम की पुण्य धरा गुमनाम सी थी। वर्ष 1992 में डीआरआइ की स्थापना के चार साल बाद 1996 में भाजपा ने चिंतन शिविर किया तो चित्रकूट को सियासी हल्कों में अलग पहचान मिलने लगी। वर्ष 2005 में संघ का पांच दिवसीय अखिल भारतीय स्तर का चिंतन शिविर होने के बाद चित्रकूट प्रमुख सियासी दलों को भाया। 2014-15 में भी संघ की बड़ी बैठक होने के बाद उसके प्रमुख प्रकल्पों की यहां हर साल ही बैठकें होती रहती हैं। विहिप के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक सिंघल कई बार चित्रकूट आए थे। राम मंदिर आंदोलन की रणनीति भी यहीं से बनी थी।

वर्ष 1999 में उत्तर प्रदेश की सरकार में तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह को जब हटाने की प्रक्रिया शुरू हुई तो वह चित्रकूट पहुंचे थे। यहां नाना जी देशमुख व संघ के पदाधिकारियों के साथ विचार-विमर्श कर उसी दिन शाम को उन्होंने लखनऊ पहुंचकर इस्तीफा दिया था। चित्रकूट में हुए फैसले ने ही मप्र के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की किस्मत बदल दी। उमा भारती के कार्यों से असंतुष्ट होकर संघ की सलाह पर ही उनकी 2004 में ताजपोशी हुई थी। तब से वह मध्य प्रदेश की सत्ता में हैं। 2016 में भाजपा की प्रांतीय बैठक हुई, जिसके बाद 2017 में सरकार बनी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आठ बार यहां आ चुके हैं तो पिछले साल प्रधानमंत्री मोदी भी आए थे। संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी मदनदास देवी, सुरेश सोनी आदि दिग्गजों का अक्सर आना रहता है। प्रांत प्रचारक बैठक से पूर्व भी संघ प्रमुख मोहन भागवत कई बार चित्रकूट आ चुके हैं।

– कांग्रेस और सपा भी यहां कर चुकी चिंतन
भाजपा और संघ से विपरीत विचारधारा के नेता और दलों को भी धर्मनगरी भाती रही है। सपा ने सरकार रहते हुए 2005 में पांच दिवसीय चिंतन शिविर यहां रखा था। तब के मुख्यमंत्री मुलायम सिंह और उनके युवराज अखिलेश पांच दिन दीनदयाल शोध संस्थान में ठहरे थे। कांग्रेस ने 2006 में चित्रकूट में तीन दिवसीय युवा चिंतन शिविर रखा और राहुल गांधी को यहीं से युवा नेता के तौर पर पार्टी में प्रोजेक्ट किया गया। हालांकि, कांग्रेस के नेताओं ने डीआरआइ से दूरी बनाकर रखी। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, वीपी सिंह, चंद्रशेखर यहां आते रहे हैं।

– इन दिग्गजों ने भी यहां रखे कदम
पूर्व राष्ट्रपति डा. एपीजे अब्दुल कलाम, राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई, लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, नितिन गडकरी, अमित शाह, राजनाथ सिंह, सुषमा स्वराज, सुमित्रा महाजन समेत भाजपा के शीर्ष दिग्गज नेता भी यहां आ चुके हैं।

( शरद मिश्रा- संपादक )
( सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश )



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