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विधायक प्रकाश की 'अनोखी कार्यशैली': 'कुर्सी' छोड़ गली की 'सैर' फुटपाथ पर सुनते हैं 'दर्द'
उत्तर प्रदेशबुंदेलखंडविधानसभा चुनाव 2027

विधायक प्रकाश की ‘अनोखी कार्यशैली’: ‘कुर्सी’ छोड़ गली की ‘सैर’ फुटपाथ पर सुनते हैं ‘दर्द’

शरद मिश्रा सम्पादक सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश

  • शरद मिश्रा

बांदा। विधायक प्रकाश द्विवेदी ने “नेता की परिभाषा” ही बदल दी है। उनकी कार्यशैली “बांदा की सियासत में नई लकीर खींच” रही है। ऑफिस में बैठकर “फाइलें निपटाने की बजाय प्रकाश द्विवेदी रोजाना शहर के वार्डों में वाकिंग” पर निकलते हैं। जनता के बीच,जनता के साथ, जनता की समस्या का मौके पर निस्तारण। यही है प्रकाश द्विवेदी का वर्किंग स्टाइल

विधायक प्रकाश की 'अनोखी कार्यशैली': 'कुर्सी' छोड़ गली की 'सैर' फुटपाथ पर सुनते हैं 'दर्द'प्रकाश द्विवेदी का “सबसे बड़ा हथियार” है उनकी “पैदल गश्त”। सुबह होते ही वह किसी न किसी वार्ड में पहुंच जाते हैं। “न काफिला न हूटर”। गली मोहल्ले में घूमकर सीधे “लोगों के दरवाजे खटखटाते” हैं। चाय की दुकान पर रुकते हैं, बुजुर्गों के पास बैठते हैं। लोग बेझिझक अपनी बात रखते हैं। यही वजह है कि “जनता उन्हें विधायक कम, घर का बेटा ज्यादा” मानती है।

विधायक प्रकाश की 'अनोखी कार्यशैली': 'कुर्सी' छोड़ गली की 'सैर' फुटपाथ पर सुनते हैं 'दर्द'प्रकाश द्विवेदी फरियादियों को लखनऊ या बांदा ऑफिस के चक्कर नहीं लगवाते। सड़क, नाली, बिजली, पानी, पेंशन की शिकायत मिलते ही वहीं से “संबंधित अफसर को फोन घुमा” देते हैं। कई मामलों में जेसीबी और कर्मचारी मौके पर ही बुलवा लेते हैं। बुधवार को ही भ्रमण के दौरान एक बुजुर्ग की रुकी पेंशन की शिकायत पर उन्होंने समाज कल्याण अधिकारी को फोन कर 24 घंटे में काम कराने का अल्टीमेटम दिया।

विधायक प्रकाश की 'अनोखी कार्यशैली': 'कुर्सी' छोड़ गली की 'सैर' फुटपाथ पर सुनते हैं 'दर्द'फुटपाथ पर सब्जी बेच रही महिला के पास जमीन पर बैठकर सब्जी खरीदना हो या ठेले वाले से पानी पीना। प्रकाश द्विवेदी का “हर कदम बीआईपी कल्चर पर चोट” करता है। जनता कहती है कि चुनाव के बाद नेता दिखते नहीं, पर प्रकाश द्विवेदी रोज दिखते हैं। इसी “सादगी ने उन्हें खास” बना दिया है।

विधायक प्रकाश की 'अनोखी कार्यशैली': 'कुर्सी' छोड़ गली की 'सैर' फुटपाथ पर सुनते हैं 'दर्द'समस्या सुनकर भूल जाना प्रकाश द्विवेदी की डिक्शनरी में नहीं है। दो दिन बाद उसी मोहल्ले में दोबारा पहुंचकर पूछते हैं कि काम हुआ या नहीं। “अफसरों की लापरवाही” पकड़ी गई तो उसी “समय क्लास” लगा देते हैं। इस फॉलोअप सिस्टम ने सरकारी मशीनरी को भी अलर्ट मोड पर ला दिया है। बांदा की “सड़कों पर जब विधायक पैदल चलता है तो भरोसा अपने आप चलने” लगता है। प्रकाश द्विवेदी की कार्यशैली बता रही है कि जनता से कटकर नहीं, जुड़कर ही राजनीति लंबी चलती है। ऑफिस की कुर्सी से ज्यादा ताकत गली के उस भरोसे में है जो प्रकाश द्विवेदी रोजाना कमा रहे हैं।

 
 



Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh
 





 

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