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महुआ की खुशबू, आदिवासियों की खुशहाली: चित्रकूट के जंगलों में खिली आजीविका की आशा
उत्तर प्रदेश

महुआ की खुशबू, आदिवासियों की खुशहाली: चित्रकूट के जंगलों में खिली आजीविका की आशा”

विनोद मिश्रा डायरेक्टर सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश

  • विनोद मिश्रा

चित्रकूट। जंगलों की गहराइयों में जब महुआ के फूलों की खुशबू हवाओं में घुलती है, तो चित्रकूट के आदिवासी इलाकों में यह मौसम किसी पर्व से कम नहीं होता। डोडिया, मझगवां, मानिकपुर जैसे आदिवासी बहुल गांवों में इन दिनों सुबह की पहली किरण के साथ एक अलग ही हलचल देखने को मिलती है टोकरियों और बोरियों के साथ महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग जंगल की ओर निकल पड़ते हैं, और शुरू होता है ‘महुआ बिनाई का उत्सव’। महुआ के फूल, जो जंगल में पेड़ों के नीचे पीले रंग की चादर की तरह बिछ जाते हैं, आदिवासी समुदाय के लिए केवल फूल नहीं हैं, बल्कि अर्थव्यवस्था, परंपरा और पहचान का प्रतीक हैं।

महुआ की खुशबू, आदिवासियों की खुशहाली: चित्रकूट के जंगलों में खिली आजीविका की आशा

महुए का प्रयोग खाद्य, औषधि और शराब निर्माण जैसे विभिन्न रूपों में किया जाता है, जिससे ग्रामीणों को आय के कई स्रोत मिलते हैं। डोडिया गांव की बुज़ुर्ग महिला सोमवती देवी बताती हैं, “महुआ हमारे लिए भगवान का वरदान है। जब तक जंगल में महुआ गिरता है, तब तक हमारे घरों में चूल्हा जलता है और बच्चों के लिए चप्पल-कपड़े आते हैं।” महुआ चुनने का यह सिलसिला मार्च से मई तक चलता है। हर सुबह गांव की महिलाएं सिर पर टोकरियाँ रखे जंगलों का रुख करती हैं। महुआ के फूलों की सौंधी खुशबू जंगलों में एक मधुर संगीत-सी गूंजती है। इन फूलों को सुखाकर बेचा जाता है, जिससे ग्रामीणों को एक सीज़न में हज़ारों रुपये की आमदनी हो जाती है।

महुआ की खुशबू, आदिवासियों की खुशहाली: चित्रकूट के जंगलों में खिली आजीविका की आशा

साथ ही कई स्वयं सहायता समूह इन फूलों से मिठाई, स्किन प्रोडक्ट, तेल व लोकल पेय भी तैयार करते हैं, जो आज स्थानीय बाज़ारों से लेकर ऑनलाइन प्लेटफार्म तक पहुंच रहे हैं। महुआ न केवल इन समुदायों की आर्थिक रीढ़ है, बल्कि सांस्कृतिक रीति-रिवाजों से भी गहराई से जुड़ा है। विवाह, त्योहार और पारंपरिक आयोजनों में महुआ से बनी वस्तुएं अनिवार्य रूप से सम्मिलित होती हैं। वन विभाग और स्थानीय प्रशासन भी अब इस महुआ उत्सव को एक संभावनाशील ग्रामीण अर्थव्यवस्था के रूप में देख रहा है। प्रस्तावित योजनाओं में स्थानीय स्तर पर प्रोसेसिंग यूनिट की स्थापना, महुआ-आधारित उत्पादों का ब्रांडिंग, और विपणन की व्यवस्थाओं पर विचार किया जा रहा है।

 

 

 

Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh

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