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फार्मर रजिस्ट्री 'फेल': 62 हजार किसान फंसे, अब 'सम्मान निधि' पर लटकती 'तलवार' !
उत्तर प्रदेश

फार्मर रजिस्ट्री ‘फेल’: 62 हजार किसान फंसे, अब ‘सम्मान निधि’ पर लटकती ‘तलवार’ !

विनोद मिश्रा डायरेक्टर सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश

  • विनोद मिश्रा

बांदा। जिले में “फार्मर रजिस्ट्री योजना” अब “किसानों के लिए राहत नहीं, बल्कि संकट” का “कारण” बनती जा रही है। “डेढ़ साल” से चल रही इस प्रक्रिया की “हकीकत” यह है कि आज भी 62 हजार से ज्यादा “किसान सिस्टम में फंसे” हुए हैं, जबकि सरकार ने “साफ चेतावनी” दे दी है कि मार्च के बाद बिना रजिस्ट्री वाले किसानों की प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि सहित सभी योजनाएं बंद कर दी जाएंगी।

फार्मर रजिस्ट्री 'फेल': 62 हजार किसान फंसे, अब 'सम्मान निधि' पर लटकती 'तलवार' !

सरकारी आंकड़े खुद व्यवस्था की पोल खोल रहे हैं। जिले के 2,51,390 पंजीकृत किसानों में से केवल 1,88,708 की ही रजिस्ट्री हो पाई है, जबकि 62,682 किसान अब भी बाहर हैं। यानी हर चौथा किसान आज भी सरकारी सिस्टम की खामियों का शिकार है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब योजना को अनिवार्य किया गया था, तो उसकी तैयारी क्यों नहीं की गई? किसानों को समय पर सुविधा देने के बजाय उन्हें दफ्तर-दफ्तर भटकने पर मजबूर कर दिया गया। आधार और खतौनी में नामों की गड़बड़ी, 200 से ज्यादा गांवों का भूलेख ऑनलाइन न होना -ये सब मिलकर पूरी प्रक्रिया को मजाक बना रहे हैं।

फार्मर रजिस्ट्री 'फेल': 62 हजार किसान फंसे, अब 'सम्मान निधि' पर लटकती 'तलवार' !

जमीनी हकीकत यह है कि किसान खेत छोड़कर सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन समाधान के बजाय उन्हें सिर्फ तारीख पर तारीख मिल रही है। हालात इतने खराब हैं कि “नौ दिन चले अढ़ाई कोस” वाली कहावत यहां पूरी तरह फिट बैठ रही है। सरकार का दावा है कि फार्मर रजिस्ट्री से पारदर्शिता आएगी और किसानों को योजनाओं का लाभ मिलेगा। लेकिन मौजूदा स्थिति में यही योजना किसानों के लिए सबसे बड़ी बाधा बन गई है। अगर मार्च तक रजिस्ट्री नहीं हुई तो हजारों किसानों की सम्मान निधि, फसल बीमा, ऋण और आपदा राहत सब कुछ एक झटके में बंद हो सकता है।

फार्मर रजिस्ट्री 'फेल': 62 हजार किसान फंसे, अब 'सम्मान निधि' पर लटकती 'तलवार' !

उपकृषि निदेशक अभय यादव ने भी साफ कर दिया है कि बिना रजिस्ट्री कोई भी योजना का लाभ नहीं मिलेगा। यानी अब गेंद पूरी तरह किसानों के पाले में डाल दी गई है, जबकि समस्या सिस्टम की है। सबसे गंभीर बात यह है कि जो किसान पहले ही आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं, अब उन पर योजनाएं बंद होने का खतरा मंडरा रहा है। यह सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि किसानों के भविष्य के साथ सीधा खिलवाड़ है।

 

 

 

Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh

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