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बुन्देलखंड में शहद की बजेगी शहनाई: जैविक शहद की खेती की ओर रुझान !
उत्तर प्रदेश

बुन्देलखंड में शहद की बजेगी शहनाई: जैविक शहद की खेती की ओर रुझान !

विनोद मिश्रा डायरेक्टर सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश

  • विनोद मिश्रा

बांदा। बुंदेलखंड में अब शहद की शहनाई बजेगी। जैविक खेती के साथ ही अब किसानों का रुझान जैविक शहद की तरफ बढ़ रहा है। यहां साल के पांच महीनों में शहद उत्पादन की अच्छी संभावनाएं हैं। यह कम लागत में अधिक मुनाफे वाला व्यवसाय है। खेत में ही मधुमक्खियां पालकर किसान अपनी आमदनी का जरिया बढ़ा सकते हैं। यहां के प्रगतिशील किसान ने इसकी बानगी भी कर दिखाई है।

बुन्देलखंड में शहद की बजेगी शहनाई: जैविक शहद की खेती की ओर रुझान !

जैविक शहद उत्पादन में यूरोपियन मधुमक्खी (एपिस मैलीफेरा) की खास भूमिका है। बांदा जनपद के छनेहरा गांव में स्थित बुंदेलखंड जैविक कृषि फार्म में इन दिनों सरसों के खेत में प्रगतिशील युवा किसान मोहम्मद असलम यूरोपियन प्रजाति की एपिस मैलीफेरा मधुमक्खी पाल रहे हैं।

बुन्देलखंड में शहद की बजेगी शहनाई: जैविक शहद की खेती की ओर रुझान !

उन्होंने मक्खियों की 14 कालोनियां (पालन डिब्बे) लगाएं हैं। मधुमक्खी आसपास सरसों के फूलों से रस जुटाकर डिब्बों में रखे छत्तों में शहद बना रहीं हैं। कृषक असलम बताते हैं कि अन्य प्रजातियों की तुलना में यह मक्खी काफी शांतिप्रिय है। बहुत कम आक्रामक होती है। अधिक मेहनत करके अधिक शहद तैयार करती है। बताया मात्र एक माह में सरसों से शुद्ध 23 किलो शहद का उत्पादन किया है। शुद्ध शहद की बाजार में कीमत 400 रुपये प्रति किलो से ज्यादा ही है।

बुन्देलखंड में शहद की बजेगी शहनाई: जैविक शहद की खेती की ओर रुझान !

बुंदेलखंड में जैविक शहद किसानों के लिए काफी फायदेमंद कारोबार है। किसान असलम बताते हैं कि पूर्ण विकसित और स्वस्थ एक यूनिट से एक सीजन में 30 से 40 किलो शहद लिया जा सकता है। फसलों में पर्याप्त मात्रा में पोलेन व नेक्टर मिलने पर हर सप्ताह शहद निकाला जा सकता है। बुंदेलखंड में पूरे सीजन नवंबर से मार्च तक सरसों, अरहर, मटर, चना आदि फसलें होतीं हैं।

बुन्देलखंड में शहद की बजेगी शहनाई: जैविक शहद की खेती की ओर रुझान !

इनमें पर्याप्त पोलेन व नेक्टर रहता है। इस सीजन में 20 से 40 किलो तक शहद का उत्पादन किया जा सकता है। अप्रैल से जून तक करंज, बबूल, नीम, मकई, ज्वार, बाजरा आदि की खेती रहती है। क्षेत्रीय उपलब्धता के अनुसार, इनसे भी पर्याप्त शहद उत्पादन लिया जा सकता है।

 

 

Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh

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