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October 11, 2026
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चित्रकूट में औरंगजेब से जुड़ा दिलचस्प अध्याय: 'मुगल बादशाह' ने बनवाया था 'बालाजी मंदिर'
उत्तर प्रदेश

चित्रकूट में औरंगजेब से जुड़ा ‘दिलचस्प’ अध्याय: ‘मुगल बादशाह’ ने बनवाया था ‘बालाजी मंदिर’

विनोद मिश्रा डायरेक्टर सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश

  • विनोद मिश्रा

चित्रकूट। देश में इन दिनों “मंदिर-मस्जिद और हिंदू-मुस्लिम” राजनीति को लेकर “बहस तेज” है, लेकिन इसी बीच “धार्मिक नगरी चित्रकूट से जुड़ा एक ऐसा ऐतिहासिक प्रसंग” सामने आया है जो लोगों को चौंका देता है। स्थानीय परंपराओं और जनश्रुतियों के अनुसार रामघाट क्षेत्र में स्थित बालाजी मंदिर चित्रकूट का निर्माण मुगल बादशाह औरंगजेब के आदेश पर कराया गया था। बताया जाता है कि वर्ष 1683 से 1686 के बीच इस मंदिर का निर्माण कराया गया और मंदिर की व्यवस्था के लिए बड़ी मात्रा में जमीन भी दान दी गई। इस घटना को लेकर आज भी क्षेत्र में चर्चा होती है और मंदिर में सुरक्षित ताम्रपत्र को इस इतिहास का प्रमाण माना जाता है।

चित्रकूट में औरंगजेब से जुड़ा दिलचस्प अध्याय: 'मुगल बादशाह' ने बनवाया था 'बालाजी मंदिर'

स्थानीय लोगों के अनुसार मंदिर के संचालन और पूजा-पाठ की व्यवस्था के लिए मुगल शासक ने लगभग 330 बीघा जमीन मंदिर के नाम कर दी थी। इसके साथ ही आसपास के आठ गांवों के लगान को करमुक्त कर मंदिर की देख-रेख के लिए समर्पित कर दिया गया था। इतना ही नहीं, उर्दू और फारसी भाषा में लिखे फरमान में यह भी उल्लेख मिलता है कि ठाकुर जी के भोग के लिए राजकोष से प्रतिदिन एक चांदी का सिक्का मंदिर को दान किया जाएगा। यह आदेश आज भी मंदिर में रखे ताम्रपत्र पर अंकित है!

औरंगजेब नें चित्रकूट में बनवाया था भव्य मंदिर : पूजन अर्चन के लिये दिया था 330 बीघे जमीन

जनश्रुतियों के अनुसार शुरुआत में मुगल बादशाह औरंगजेब अपनी सेना के साथ इस मंदिर को ध्वस्त करने के उद्देश्य से चित्रकूट पहुंचे थे। कहा जाता है कि मंदिर की दीवारों को नुकसान भी पहुंचाया गया, लेकिन जब सैनिकों ने मंदिर में स्थापित शिवलिंग को तोड़ने का प्रयास किया तो वे सफल नहीं हो सके। कथाओं के अनुसार शिवलिंग को नुकसान पहुंचाने की कोशिश के बाद मुगल सेना अचानक गंभीर बीमारी से ग्रस्त हो गई। सैनिकों को तेज बुखार, उल्टी-दस्त जैसी समस्याएं होने लगीं। इससे परेशान होकर मुगल शासक ने स्थानीय लोगों से कारण और समाधान जानने की कोशिश की।

औरंगजेब नें चित्रकूट में बनवाया था भव्य मंदिर : पूजन अर्चन के लिये दिया था 330 बीघे जमीन

स्थानीय लोगों ने उन्हें संत बालकदास के पास जाने की सलाह दी। बताया जाता है कि संत बालकदास ने हवनकुंड से भभूति निकालकर सैनिकों के बीच छिड़कने की सलाह दी। जनश्रुति के अनुसार जब ऐसा किया गया तो सैनिकों की बीमारी धीरे-धीरे समाप्त हो गई। इस घटना के बाद कहा जाता है कि मुगल बादशाह ने मंदिर को तोड़ने का इरादा छोड़ दिया और इसके पुनर्निर्माण का आदेश दिया। साथ ही मंदिर की देख-रेख के लिए जमीन दान करने का निर्णय लिया गया, जो आज भी बालाजी मंदिर की खतौनी में दर्ज बताई जाती है।

 

 

Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh

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