
- शरद मिश्रा
बांदा। फरवरी माह में ही “तेज धूप और बढ़ते तापमान” ने जनपद की “रबी फसलों पर संकट” खड़ा कर दिया है। सामान्यतः इस समय अधिकतम तापमान 25 से 26 डिग्री सेल्सियस के बीच रहना चाहिए, ताकि फसलों को “पर्याप्त नमी और अनुकूल वातावरण” मिल सके,लेकिन इस वर्ष फरवरी के दूसरे सप्ताह से ही तापमान 30 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है,जिसका सीधा असर “खेतों में दिखाई” देने लगा है।

गेहूं, चना, सरसों, मसूर, मटर, अलसी और मक्का की फसलें गर्मी की मार झेल रही हैं। किसानों का कहना है कि अगर मौसम का यही रुख बना रहा तो इस बार रबी की पैदावार में भारी गिरावट आ सकती है। खेतों में गेहूं की बालियां तो निकल आई हैं,लेकिन उनमें दाना भराव नहीं हो पा रहा। जिन खेतों में सिंचाई की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है, वहां फसल सूखने लगी है।

प्रगतिशील किसान प्रेम सिंह बताते हैं कि गेहूं की फसल को पकने के दौरान नमी की अत्यधिक आवश्यकता होती है। लेकिन तेज धूप और बढ़ते तापमान के कारण पौधों को पर्याप्त पोषक तत्व नहीं मिल पा रहे। इससे बालियों में दाने कम आ रहे हैं। पैदावार पर सीधा असर पड़ने की आशंका है। कृषि वैज्ञानिक दिनेश साहा नें किसानों को सलाह दी है कि गेहूं की फसल में पोटेशियम 00:5 रसायन का छिड़काव करें तथा नियमित सिंचाई जारी रखें, ताकि पौधों को सूखने से बचाया जा सके।
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