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August 26, 2026
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तालाबों ने खोला 'खजाना' : सिंघाड़े की खेती व मछली पालन से 'आय' हुई 'दोगुनी'
उत्तर प्रदेश

तालाबों ने खोला ‘खजाना’ : सिंघाड़े की खेती व मछली पालन से ‘आय’ हुई ‘दोगुनी’

विनोद मिश्रा डायरेक्टर सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश

  • विनोद मिश्रा

बांदा। चित्रकूट मंडल में परंपरागत खेती के साथ-साथ अब किसान नई सोच और आधुनिक तकनीक के जरिए अपनी आमदनी बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। जिले में खाली पड़े तालाब अब केवल पानी का भंडार नहीं रह गए हैं,बल्कि सिंघाड़े की खेती और मछली पालन का नया स्रोत बन गए हैं। सरकारी योजनाओं और सब्सिडी के सहारे किसान इन तालाबों से दोहरी आमदनी प्राप्त कर रहे हैं।

तालाबों ने खोला 'खजाना' : सिंघाड़े की खेती व मछली पालन से 'आय' हुई 'दोगुनी'

मंडल के चारों जिलों में खेत तालाब योजना के तहत करीब तीन हजार से ज्यादा तालाब बनाए गए हैं। इसके साथ ही ग्राम पंचायतों में अमृत सरोवर और मॉडल तालाब विकसित किए गए हैं। अब इन तालाबों में किसान सिंघाड़े की खेती संग मछली पालन कर रहे हैं, जिससे उनकी आय बढ़ रही है।

तालाबों ने खोला 'खजाना' : सिंघाड़े की खेती व मछली पालन से 'आय' हुई 'दोगुनी'

भूगर्भ जल स्तर भी सुधर रहा है। सरकार की पहल के तहत तालाबों में सिंघाड़े की खेती व मछली पालन के लिए सब्सिडी और तकनीकी सहयोग भी दिया जा रहा है। जागरूक किसान इस अवसर को भुनाकर दोहरे लाभ ले रहे हैं, जबकि अभी भी कई तालाब खाली पड़े हैं।

तालाबों ने खोला 'खजाना' : सिंघाड़े की खेती व मछली पालन से 'आय' हुई 'दोगुनी'

बुंदेलखंड की जलवायु सिंघाड़े की खेती के लिए उपयुक्त है। सिंघाड़ा रोपाई के 120-130 दिन में तैयार हो जाता है। बेलों की रोपाई जुलाई के प्रथम सप्ताह से 15 अगस्त तक की जाती है और पहली कटाई अक्टूबर के प्रथम सप्ताह में शुरू होती है। अंतिम कटाई 20 से 30 दिसंबर के बीच की जाती है। कुल चार बार सिंघाड़े की तोड़ाई होती है।

तालाबों ने खोला 'खजाना' : सिंघाड़े की खेती व मछली पालन से 'आय' हुई 'दोगुनी'

कृषि वैज्ञानिक डॉ. एस. वी. द्विवेदी बताते हैं कि सिंघाड़े के तालाब में मछली पालन संभव है, जिससे किसान अपनी आय में इजाफा कर सकते हैं। एक हेक्टेयर तालाब में सिंघाड़े की खेती का खर्च करीब 40-45 हजार रुपये आता है। प्रति हेक्टेयर भूमि से 25-30 टन सिंघाड़े की पैदावार होती है। यदि बाजार में सिंघाड़ा 30 रुपये प्रति किलो बिकता है, तो खर्च निकालने के बाद भी लगभग 1 लाख रुपये का मुनाफा बचता है। इसके साथ ही मछली पालन से और आय होती है,जिससे किसान का दोहरा मुनाफा सुनिश्चित होता है।

 

 

 

Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh

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