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धरती की कोख सूख रही: पानी की एक-एक बूंद पर खतरा, बर्बादी पर सिस्टम खामोश
उत्तर प्रदेश

धरती की कोख सूख रही: पानी की एक-एक बूंद पर खतरा, बर्बादी पर सिस्टम खामोश

विनोद कुमार मिश्रा ( सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश )

  • विनोद मिश्रा

बांदा। बांदा में पानी अब सिर्फ एक संसाधन नहीं, बल्कि एक गहराता संकट बनता जा रहा है। जिले में जल संरक्षण को लेकर शासन की योजनाएं कागज़ों में हैं, मगर जमीनी हकीकत भयावह है। न तो जिम्मेदार चेते हैं और न ही आम नागरिक जागरूक हैं। नतीजा धरती की कोख हर साल डेढ़ मीटर तक सूख रही है और जल बर्बादी पर लगाम लगाने वाला कोई नहीं। अब प्रशासन जागा है। भूगर्भ जल विभाग ने बड़ा निर्णय लिया है। व्यावसायिक भवनों और सबमर्सिबल से पानी खींचने वाले घरों में अब फ्लो मीटर लगाया जाएगा। इसकी कीमत लगभग 20 हजार रुपये होगी और खर्च भवन स्वामी को खुद उठाना पड़ेगा।

धरती की कोख सूख रही: पानी की एक-एक बूंद पर खतरा, बर्बादी पर सिस्टम खामोश

iयह मीटर हर रोज खपत होने वाले पानी का डिजिटल हिसाब देगा। एक क्लिक में अधिकारियों को पता चल जाएगा कि किसने कितनी बर्बादी की।शहर में 60 से अधिक आरओ प्लांट, दर्जनों होटल, शॉपिंग मॉल और रेस्टोरेंट संचालित हो रहे हैं, जिनमें जल दोहन चरम पर है। शासन ने वर्षों पहले इन व्यावसायिक भवनों में वाटर रिचार्जिंग सिस्टम लगाना अनिवार्य किया था, लेकिन हकीकत यह है कि 90% से अधिक स्थानों पर इसका कोई नामोनिशान नहीं है। जल के दोहन का सिलसिला बेरोकटोक जारी है। शहर की पेयजल आपूर्ति व्यवस्था चरमराई हुई है, जिसके चलते हर घर में सबमर्सिबल लगे हैं।

धरती की कोख सूख रही: पानी की एक-एक बूंद पर खतरा, बर्बादी पर सिस्टम खामोश

सुबह से शाम तक टोंटियों से बहता पानी अब बांदा की नियति बन चुका है। एक ओर लोग पानी की एक-एक बूंद को तरस रहे हैं, दूसरी ओर कुछ गिने-चुने वर्ग पानी की बर्बादी में मस्त हैं। यही वर्ग भूजल संकट का मूल कारण बनते जा रहे हैं। नगर क्षेत्र में तालाबों, कुओं और जल स्त्रोतों की हालत खस्ता है। इनका संरक्षण ना के बराबर है। पानी रिचार्ज नहीं हो रहा, सिर्फ निकासी हो रही है। वैज्ञानिकों की मानें तो जल संतुलन के बिना अगला दशक भयावह हो सकता है। बांदा में जल संकट का बवंडर आने वाले समय में और विकराल होगा यदि आज ही रोकथाम के कठोर कदम नहीं उठाए गए। प्रशासन ने फ्लो मीटर जैसे कुछ कड़े फैसले लिए हैं, लेकिन अब जरूरत है सख्त निगरानी, सक्रियता और सजा की।

 

 

Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh

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